चंडीगढ़ , अप्रैल 24 -- हरियाणा सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए बड़े कदम उठा रही है। सरकार 23 नए सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (सीएसएसक्यूएमएस) स्थापित किए जाएंगे, जिससे जुलाई 2026 तक इनकी संख्या 52 हो जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण स्तर में 30-35% तक कमी लाना है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने समीक्षा बैठक में नगर निगमों को पांच प्रमुख सड़कों को "धूल-मुक्त" मॉडल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। परिवहन, निर्माण और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्ती से नियंत्रण करने पर जोर दिया गया।
वाहन प्रदूषण की निगरानी के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। उन्नत तकनीक से चलते वाहनों की जांच कर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी। जल्द ही कैब और राइड-शेयरिंग सेवाओं के लिए एग्रीगेटर नीति लागू की जाएगी, जिससे इन सेवाओं को नियामक ढांचे में लाया जा सके।
एनसीआर में डीजल ऑटो को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, जो 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। "नया सफर योजना" के तहत 1.9 लाख पुराने ट्रक और 16 हजार बसें बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदली जाएंगी।
औद्योगिक क्षेत्र में 889 में से 871 इकाइयों ने उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) लगा ली है। पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई है।
नगर योजनाओं में धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार, ई-बसें, चार्जिंग स्टेशन और कचरा प्रबंधन शामिल हैं। 31 मार्च 2027 तक पुराने कचरे के पूर्ण निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
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