सहारनपुर , जनवरी 19 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मनाही के बावजूद सहारनपुर जिले में बड़ी संख्या में ईंट और भट्टे धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे बड़े स्तर पर प्रदूषण फैल रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर उसका बहुत ही बुरा असर हो रहा है।

इस संबंध में पर्यावरण कार्यकर्त्ता उत्कर्ष पंवार ने आज बताया कि एनजीटी ने पिछले साल 19 दिसंबर को आदेश जारी कर कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईंट-भट्टों का संचालन मार्च से जून तक ही किया जाना चाहिए। लेकिन पर्यावरण विभाग इन आदेशों को लेकर पूरी तरह से निष्क्रियता के चलते सहारनपुर जिले में इन दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के करीब है जो कि स्वास्थ्य के लिए खराब श्रेणी में आता है। एक्यूआई-50 तक ही सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है।

पर्यावरण कार्यकर्त्ता उत्कर्ष पंवार ने इस संबंध में पर्यावरण और दूसरे उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर एनजीटी के आदेशों का पालन करने की मांग की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा योगेंद्र कुमार ने माना कि जिले में बड़ी संख्या में ईंट-भट्टे संचालित हो रहे हैं। इसकी जिम्मेदारी ईंट-भट्टा समिति पर है। जिसने एनजीटी में शपथ पत्र देकर भरोसा दिया था कि ईंट-भट्टे एनजीटी के निर्देशों के मुताबिक मार्च से जून में ही चलाए जाएंगे। इस मामले में एनजीटी में जिलाधिकारी सहारनपुर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहारनपुर भी पार्टी बनाए गए थे।

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