मुंबई , मार्च 06 -- एण्डटीवी की कलाकारों ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला होने के अपने अनुभव साझा किये हैं।
एण्डटीवी के आगामी शो 'हे भगवान-कितना बदल गया इंसान' में ईना की भूमिका निभा रहीं अक्षया नाइक कहती हैं, "एक कलाकार के तौर पर मेरे दिन काफी व्यस्त होते हैं, लेकिन कैमरे के बाहर मैं एक बेटी, एक दोस्त और अपने रिश्तों को महत्व देने वाली इंसान भी हूँ। एक महिला होने का मतलब है लगातार अलग-अलग भूमिकाएँ निभाना-सेट पर स्क्रिप्ट याद करना और घर पर अपने परिवार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहना। मैंने महसूस किया है कि जब भी मैं किसी को अपना समय, धैर्य या हौसला देती हूँ, मैं भीतर से और मजबूत बनती हूँ। मेरे लिए #गीवटूगेन का मतलब है कि जब हम किसी दूसरी महिला के सपनों का साथ देते हैं, तो हम सब मिलकर मजबूत बनते हैं। इस महिला दिवस पर मैं उन लड़कियों को आत्मविश्वास देना चाहती हूँ जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सीमाएँ तोड़ना चाहती हैं।"'घरवाली पेड़वाली' में लतिका का किरदार निभा रहीं प्रियंवदा कांत कहती हैं, "मेरे जीवन में कई भूमिकाएँ हैं-अपने काम के प्रति समर्पित एक अभिनेत्री, परिवार के प्रति जिम्मेदार एक बेटी और लगातार सीखने वाली एक महिला। कई बार इन सबके बीच संतुलन बनाना मुश्किल लगता है, लेकिन यही एक महिला की असली ताकत भी है। हम संवारते हैं, साथ देते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। मेरे लिए #गीवटूगेन का मतलब है दया देना, मार्गदर्शन देना और जहाँ संभव हो अवसर देना। जब हम किसी दूसरी महिला को आगे बढ़ाते हैं, तो हमें भी आत्मविश्वास और एकता मिलती है। सशक्तिकरण तब शुरू होता है जब हम एक-दूसरे का साथ देना चुनते हैं।"'हप्पू की उलटन पलटन' में राजेश की भूमिका निभा रहीं गीतांजलि मिश्रा कहती हैं, "एक महिला होने का मतलब है सहजता से कई जिम्मेदारियाँ निभाना। पर्दे पर मैं दर्शकों को हँसाती हूँ, लेकिन असल जीवन में मैं अपनी माँ की ताकत और संघर्ष से प्रेरणा लेने वाली बेटी भी हूँ। मैंने देखा है कि परिवार को संभालने के लिए महिलाएँ भावनात्मक और शारीरिक रूप से कितना कुछ देती हैं। #गीवटूगेन मुझे यह याद दिलाता है कि हम जितना देते हैं, उतना ही अनुभव, साहस और दूसरों को प्रेरित करने की शक्ति भी पाते हैं। इस महिला दिवस पर आइए हम लड़कियों को शिक्षा दें, हर क्षेत्र में महिलाओं को सम्मान दें और उन लोगों का हौसला बढ़ाएँ जो खुद पर संदेह करते हैं, क्योंकि छोटा सा सहयोग भी बड़ा बदलाव ला सकता है।"'भाबीजी घर पर हैं' में अंगूरी भाबी का किरदार निभा रहीं शिल्पा शिंदे कहती हैं, "सालों से मैंने अपने करियर, निजी जीवन और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाया है। मेरा मानना है कि एक महिला होने का मतलब है हर भूमिका को पूरे दिल और दृढ़ता के साथ निभाना। हम घर में देखभाल करने वाली हैं, काम में पेशेवर हैं और अपने प्रियजनों के लिए ताकत का सहारा भी। कई बार हम भूल जाते हैं कि हम रोज कितना कुछ संभालते हैं। मुझे लगता है कि आत्मविश्वास की शुरुआत इस बात से होती है कि हम खुद को कैसे देखते हैं। इसलिए इस महिला दिवस पर एण्डटीवी के 'सेल्फी लो, शाइन करो, स्टार बन जाओ!' अभियान का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह एक खूबसूरत पहल है, जहाँ महिलाएँ क्राउन मिरर इंस्टॉलेशन के सामने सेल्फी लेकर खुद को आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और मजबूत महसूस कर सकती हैं। मुझे खुशी है कि मैं इस अभियान का हिस्सा बनूँगी, प्रेरणादायक महिलाओं से मिलूँगी और उनकी कहानियों का जश्न मनाऊँगी।
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