मोतिहारी , फरवरी 28 -- बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में आयोजित "भारत की परिवर्तनकारी शिक्षा क्रांति" विषय पर आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 ने राष्ट्रीय शिक्षा विमर्श को नई दिशा दी।
मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित इस एक दिवसीय भव्य आयोजन में देशभर से आए 50 से अधिक कुलपति, शिक्षाविद्, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता एवं नीति-निर्माताओं ने सहभागिता कर इसे राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा संवाद का महत्त्वपूर्ण मंच बना दिया।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री एवं सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि "शिक्षा में राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रनीति होनी चाहिए।" उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम से जोड़ते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने की। विशिष्ट अतिथियों में यूजीसी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. दीपक श्रीवास्तव, नालंदा विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. सुनैना सिंह, मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) के प्रो. बलराम सिंह तथा आईआईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव शामिल रहे।
कॉन्क्लेव की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मुख्य प्रॉक्टर प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि यह आयोजन शिक्षा, नीति, उद्योग और समाज के बीच सेतु का कार्य करेगा।
कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और बहुविषयी शिक्षा को भारतीय संदर्भ में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे नीति, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद का राष्ट्रीय मंच बताया।
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