पटना , दिसंबर 20 -- बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के उप- निदेशक डॉ राजेश सिन्हा ने शनिवार को कहा कि प्रदेश में एचआईवी से संक्रमित लोगों के इलाज, दवा और परामर्श के लिये राज्य सरकार साल के अंत तक बिहार में पांच नये एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर खोलने जा रही है।

श्री सिन्हा ने बताया कि सरकार की इस पहल के बाद राज्य में एआरटी सेंटरों की कुल संख्या बढ़कर 34 हो जायेगी। नये सेंटर खुलने से हजारों मरीजों को अपने ही जिले या नजदीकी बड़े चिकित्सा संस्थान में नियमित इलाज की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल बिहार के 26 जिलों में 29 एआरटी सेंटर संचालित हैं। इसके बावजूद कई जिलों के मरीजों को इलाज के लिये दूसरे जिले में जाना पड़ता है। इसे देखते हुये बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने राज्य के प्रत्येक जिले में एआरटी सेंटर खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे संक्रमित लोगों को दवा और मार्गदर्शन के लिये अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़े।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 के बाद राज्य में 15 नये एआरटी सेंटर खोले जा चुके हैं, जिससे इनकी संख्या 29 हो गई है। जिन जिलों में एआरटी सेंटर की सुविधा उपलब्ध है उनमें पटना, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मोतिहारी, सीतामढ़ी, आरा, छपरा, जमुई, मुंगेर, भागलपुर, बांका, मुजफ्फरपुर, बेतिया, वैशाली, समस्तीपुर, नालंदा, गया जी, औरंगाबाद और रोहतास शामिल हैं। वहीं अररिया, मधेपुरा, सहरसा, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा, शिवहर और जहानाबाद जैसे जिलों में फिलहाल लिंक एआरटी सेंटर के माध्यम से मरीजों को इलाज और दवायें उपलब्ध कराई जा रही हैं।

संक्रमण की स्थिति और मरीजों की कठिनाइयों को देखते हुये समिति ने वित्तीय वर्ष 2025- 26 के अंत तक पांच नये एआरटी सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। ये सेंटर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) पटना, नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) पटना, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बिहटा और माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं एलएसके हॉस्पिटल किशनगंज में स्थापित किये जायेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित