पटना , अप्रैल 08 -- बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बुधवार को कहा कि डिजिटल युग और कृत्रिम मेधा (एआई) के इस दौर में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना अनिवार्य है। आज शिक्षा विभाग और शैक्षणिक नवाचार क्षेत्र में कार्यरत संस्था एक्स्ट्रा-सी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू )पर हस्ताक्षर किया गया।

शिक्षा मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि इस एमओयू के सुचारु क्रियान्वयन के लिये विभाग की ओर से एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में साथ लाख 60 हजार से अधिक विद्यालय हैं और विभाग बालिका शिक्षा पर विशेष बल देते हुए इस पहल में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। इस पहल के अंतर्गत बिहार के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राएं और शिक्षक मुख्य रूप से लाभार्थी होंगे। शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे क्रॉसवर्ड आधारित शिक्षण पद्धति को प्रभावी रूप से कक्षा-शिक्षण में समाहित कर सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के समग्र बौद्धिक एवं शैक्षणिक विकास में उल्लेखनीय योगदान करेगी।

अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन बिहार के विद्यालयी बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान करेगा। उन्होंने इस पहल को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में नवाचार की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

एक्स्ट्रा-सी के प्रमुख अमिताभ रंजन ने बताया कि संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर क्रॉसवर्ड आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को क्रॉसवर्ड को एक प्रभावी लर्निंग टूल के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह संस्था सीबीएसई और एआईसीटीई जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों की शब्दावली, तार्किक क्षमता एवं समस्या-समाधान कौशल को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत है।

प्राथमिक शिक्षा के निदेशक विक्रम विरकर ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए शिक्षा विभाग में हो रहे नवाचारों के प्रति शिक्षा मंत्री तथा अपर मुख्य सचिव के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन की सराहना की।

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