ऋषिकेश , मई 03 -- उत्तराखंड में तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित प्राचीन वैदिक एवं आध्यात्मिक शिक्षण संस्थान श्री वेद महाविद्यालय में रविवार को नवप्रवेशी 50 बटुकों (छात्रों) का उपनयन संस्कार विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ।

इस आयोजन ने श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों को सनातन संस्कृति की गहराई से परिचित कराया। प्रातःकालीन बेला में कार्यक्रम की शुरुआत बटुकों के पारंपरिक मुंडन संस्कार से हुई। इसके पश्चात सभी छात्रों ने त्रिवेणी संगम पर पवित्र गंगा में दशविधि स्नान कर आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त की। इस दौरान 'हर-हर गंगे' और 'जय मां गंगे' के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

समारोह में श्री स्वामीनारायण आश्रम के परमाध्यक्ष ऋषिराज सुनील भगत ने कहा कि ये ब्रह्मचारी भविष्य में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाएंगे। आचार्य सुनील दत्त बिजल्वाण ने यज्ञोपवीत संस्कार की धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्ता के बारे मे बताया।

महाविद्यालय प्रबंधक वेदाचार्य रविन्द्र किशोर शास्त्री और प्रधानाचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल के सानिध्य में बटुकों द्वारा पंचांग पूजन एवं ऋषि पूजन किया गया। इसके उपरांत गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ यज्ञोपवीत धारण कराया गया।

इस अवसर पर वेदाचार्य शास्त्री ने छात्रों को वेदों के अध्ययन और उनके जीवन में अनुपालन का संदेश दिया। कार्यक्रम में डॉ. अजीत प्रकाश नवानी, आचार्य दीपक राज कोठारी, आचार्य विपिन उनियाल, अनिकेत शर्मा, संगीता जेठुड़ी आदि उपस्थित रहे।

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