ऋषिकेश , फरवरी 02 -- उत्तराखंड के ऋषिकेश वन भूमि प्रकरण में अपने घर और जमीन बचाने की मांग को लेकर शिवाजी नगर, मीरा नगर, 20 बीघा, बापू ग्राम, मनसा देवी और अमित ग्राम के हजारों निवासी सोमवार को सड़कों पर उतर आए।
आईडीपीएल से बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले निकाली गई ऋषिकेश बचाओ संघर्ष रैली में करीब 15 हजार से अधिक लोगों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपना दमखम दिखाया। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी रैली ने आठ किलोमीटर का सफर तय करते हुए तहसील परिसर तक पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। यहां उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अपने आशियानों को बचाने के लिए नारेबाजी की और सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वन भूमि प्रकरण में या तो वनों को काटने (डिफॉरेस्ट) का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा जाए या फिर इन क्षेत्रों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए। लोगों का तर्क था कि आजादी से पहले बसे इन इलाकों के निवासियों को उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देकर उजाड़ना न्यायोचित नहीं है।
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि वे शीर्ष न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं लेकिन सरकार को जनता के हित में फैसला लेना चाहिए। उनका कहना था कि वे कोई भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। इन क्षेत्रों में राज्य और केंद्र सरकार की करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं पहले ही लागू हो चुकी हैं और कई योजनाएं अभी भी चल रही हैं, ऐसे में वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ना अन्याय होगा।
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