नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए ऋचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्व प्रमोटरों, उनके परिवार के सदस्यों, संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं और कंपनी के पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आर पी) की 112 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं।यह कार्रवाई पीएमएलए कानून के तहत की गयी है, जिसमें फरीदाबाद, रोहतक, मोहाली और अन्य स्थानों पर स्थित आवासीय प्लॉट, फ्लैट, विला, कृषि भूमि और वाणिज्यिक स्थान शामिल हैं।
ईडी ने 19 मार्च को गुरुग्राम की विशेष अदालत में कंपनी के निलंबित प्रबंध निदेशक संदीप गुप्ता और पूर्व आरपी अरविंद कुमार सहित 25 अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की थी। यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (विशेषकर इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया) को लगभग 236 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रमोटरों ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए बही-खातों में हेरफेर की थी। इसमें फर्जी बिक्री-खरीद, देनदारों और लेनदारों के बैलेंस में हेराफेरी और बैंकों को स्टॉक के गलत आंकड़े देना शामिल था। जांच में पाया गया कि अपराध की कमाई को शेल कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के जरिए प्रमोटर समूह के निजी लाभ के लिए डायवर्ट किया गया था।
यह कंपनी मुख्य रूप से टेक्सटाइल उत्पादों और प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग के निर्माण व्यवसाय में लगी हुई थी। बैंकों से ली गयी भारी क्रेडिट सुविधाओं के भुगतान में चूक के बाद इसके ऋण खातों को एनपीए और बाद में 'धोखाधड़ी' घोषित कर दिया गया था।
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