चंडीगढ़ , मार्च 07 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ ) ने 10 मार्च को लाखों पावर सेक्टर कर्मचारियों के साथ एक बड़े बहिष्कार की घोषणा की है, जिसमें संसद में विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किये जाने का विरोध किया जाएगा।

यह फ़ैसला एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे की अध्यक्षता में हुई एक ऑनलाइन बैठक में लिया गया।

इस प्रारूप विधेयक का मकसद एक ही इलाके में कई वितरक को काम करने और अवसरंचना साझा करने की इजाजत देकर बिजली वितरण के माहौल को बदलना है। इसमें पांच साल में इंडस्ट्रियल कंज्यूमर के लिए क्रॉस-सब्सिडी खत्म करने की योजना बनाते हुए लागत के हिसाब से टैरिफ का भी प्रस्ताव है।

श्री दुबे ने इस बात पर चिंता जताई कि स्टेकहोल्डर के फीडबैक को नजरअंदाज किया गया, क्योंकि ऊर्जा मंत्रालय ने कानून पर चर्चा में निजीकरण के पक्ष में समूह को शामिल किया। पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए एआईपीईएफ की बैठक रविवार आठ मार्च को देहरादून में हो रही है।

एआईपीईएफ के मीडिया सलाहकार वी के गुप्ता ने बताया कि अजयपाल सिंह अटवाल, महासचिव पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन, देहरादून में आठ सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को लीड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सख्त और शॉर्टकट तरीके अपनाने की कोई जल्दी नहीं है, जो लोकतांत्रिक कामकाज की भावना के खिलाफ हैं। उठायी गयी सभी आपत्तियों को सभी स्टेकहोल्डर्स के सामने साफ किया जाना चाहिए, ताकि आगे बढ़ने से पहले उनकी आपत्तियों और असहमति के बिन्दुओं पर ठीक से विचार किया जा सके।

श्री सुनील ग्रोवर पैट्रन एआईपीईएफ और लोकेश ठाकुर अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश से, रविंदर घनघस सचिव एचपीईए , दो इंजीनियर उपाध्यक्ष जेकेईईजीए जम्मू और कश्मीर से बैठक में शामिल होने गये हैं।

श्री दुबे ने कहा कि विधेयक को वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर रखा जा रहा है, जिसमें से एक हिस्सा ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन है, जो विधेयक के पक्ष में है। इस बीच, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज़ एंड इंजीनियर्स ने ऊर्जा मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा है कि एमओपी के स्रोत के मुताबिक, 10 मार्च को संसद में विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश करने के विरोध में देश भर के इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज़ और इंजीनियर्स को 10 मार्च 2026 को लाइटनिंग एक्शन लेने, काम बंद करने और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

एनसीसीओएईईई ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह किसान-विरोधी, उपभोक्ता विरोधी और कर्मचारी-विरोधी विधेयक पेश न करे, और घोषणा की है कि सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को नौ मार्च को दिल्ली में प्रस्तावित कानून के बुरे असर के बारे में बताया जायेगा।

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