नैनीताल , अप्रैल 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 'प्राग फार्म' भूमि विवाद से जुड़े एक अहम मामले में मैसर्स इको फ्रेंडली फूड प्रोसेसिंग पार्क लिमिटेड एवं अन्य की याचिका खारिज कर दी है।

याचिका में 483.2 एकड़ भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल की कटाई की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के पास ऐसा कोई वैध अधिकार नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें यह राहत दी जा सके।

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि संबंधित भूमि 'प्राग फार्म' का हिस्सा है, जो लंबे समय से विवादों में रही है। यह भूमि वर्ष 1933 में लीज पर दी गई थी और बाद में उत्तराधिकारियों के बीच विवाद के चलते मामला विभिन्न अदालतों तक पहुंचा।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने वर्ष 2008 में लीज डीड के आधार पर भूमि पर कब्जा लिया और अपने खर्च पर गन्ने की फसल उगाई। यह भी कहा कि अगस्त 2025 में राज्य सरकार ने जमीन का कब्जा अपने हाथ में ले लिया, जबकि उस समय फसल तैयार थी लेकिन उन्हें कटाई की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।

वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जमीन पर विधिवत कब्जा लिया जा चुका है और याचिकाकर्ताओं का अधिकार केवल उप-लीज पर आधारित है, जो खुद विवादित है। ऐसे में उन्हें जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधि की अनुमति देना संभव नहीं है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता न तो मूल लीजधारक हैं और न ही मुख्य मामले में पक्षकार रहे हैं। उनके अधिकार स्वतंत्र रूप से मान्य नहीं हैं।

इन्हीं आधारों पर उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।

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