नयी दिल्ली , जनवरी 11 -- इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएमएमए) ने केंद्र से आग्रह किया है कि 'फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर' के तहत अधिसूचित सभी उर्वरकों पर वस्तु एवं सेवा कर की दर को समान रूप से घटाकर पांच प्रतिशत किया जाए।

एसोसिएशन ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपनी बजट पूर्व सिफारिशों में उर्वरक क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए बड़े नीतिगत सुधारों की मांग की है।

एसोसिएशन ने बताया कि जीएसटी 2.0 की शुरुआत के बाद कुछ खास मदों पर टैक्स 12 से घटाकर पांच प्रतिशत करना एक "ऐतिहासिक सुधार" था, लेकिन अब भी कुछ चीजों पर अधिक जीएसटी लग रहा है। इसके कारण उनके दिए कर की वापसी मुश्किल हो जाती है और कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है। एसोसिएशन ने इस समस्या के समाधान के लिए जीएसटी क्रेडिट के तेजी से रिफंड के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध प्रणाली बनाने का प्रस्ताव दिया है।

उद्योग प्रतिनिधियों का तर्क है कि रिफंड प्रक्रिया तेज होने से नकदी की समस्या दूर होगी, जिसे गुणवत्ता सुधार, उत्पादन क्षमता और किसानों तक पहुंच बढ़ाने में निवेश किया जा सकेगा।

इसके अलावा, आईएमएमए ने 'वन नेशन, वन लाइसेंस' (एक राष्ट्र, एक लाइसेंस) ढांचे के तहत एक एकल और एकीकृत लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने की भी सिफारिश की है। वर्तमान में राज्य और जिला स्तर पर अलग-अलग लाइसेंसिंग प्रक्रिया होने से प्रशासनिक बोझ और देरी बढ़ती है।

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