जालौन , फरवरी 10 -- उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के उरई में मंगलवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक चेतना से परिपूर्ण 'श्री शिव वीथिका' का भव्य शुभारंभ किया गया।
यह आयोजन इन्टैक उरई अध्याय, कानपुर-बुंदेलखंड प्रांतीय कला धरोहर समिति, संस्कार भारती तथा भारत विकास परिषद स्वामी विवेकानंद शाखा, उरई के संयुक्त तत्वावधान में चूड़ी वाली गली स्थित श्रीमती संध्या पुरवार के आवास पर संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ शंखध्वनि के बीच उरई विकास प्राधिकरण के सचिव परमानंद यादव तथा डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष मनोज राजा ने मां सरस्वती एवं भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि परमानंद यादव ने कहा कि भगवान शिव को देवाधिदेव महादेव कहा जाना इस तथ्य का प्रमाण है कि वे संपूर्ण सृष्टि के सर्वप्रिय देव हैं। उनका संपूर्ण परिवार पूजनीय है और वे निष्काम भाव से अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं, इसी कारण उन्हें 'भोले भंडारी' कहा जाता है।
वीथिका में भगवान शिव से संबंधित दुर्लभ, ऐतिहासिक और कलात्मक संग्रहों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में लगभग 2200 वर्ष प्राचीन कुषाणकालीन सिक्कों के साथ गुप्त साम्राज्य, इंदौर राज्य तथा दक्षिण भारत के मैसूर, शिवगंगा, मदुरई और विजयनगर राज्यों (14वीं से 16वीं शताब्दी) के सिक्के प्रदर्शित किए गए। इसके अतिरिक्त नेपाल, चेक गणराज्य, थाईलैंड और अन्य देशों की मुद्राएं एवं डाक टिकट भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप तथा नंदी पर आरूढ़ शिव परिवार की लगभग 150 वर्ष प्राचीन पेंटिंग्स ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। वीथिका में शिव के विभिन्न स्वरूपों वाली आचमनियां, वासुकी नाग से युक्त कलाकृतियां, मां नर्मदा के पावन जल से प्राप्त नर्मदेश्वर महादेव के शिवलिंग, विविध प्रकार के शंखों में प्रतिष्ठित शिवलिंग तथा विभिन्न स्वरूपों के त्रिशूल भी प्रदर्शित किए गए।
डॉ. हरीमोहन पुरवार ने शिवलिंग के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शिवलिंग का आकार मानव मस्तिष्क के मेड्यूला ऑब्लांगेटा भाग से साम्य रखता है, जो शिव की परम चेतना का प्रतीक माना जाता है। प्रदर्शनी में एकमुखी से दसमुखी रुद्राक्षों सहित लगभग एक हजार रुद्राक्षों से सुसज्जित शिव श्रृंगार अत्यंत आकर्षक रहा। अकीक पत्थर पर प्रकृति द्वारा निर्मित शिव स्वरूपों ने भी आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शित समस्त सामग्री श्रीमती संध्या पुरवार एवं डॉ. हरीमोहन पुरवार के निजी संग्रह से प्रस्तुत की गई। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया। आयोजन में काजल राजपूत, प्रदीप पाटकर, डॉ. राकेश गुप्ता, श्रीमती अनीता गुप्ता, श्रीमती प्रियंका अग्रवाल, श्रीमती रीना अग्रवाल, श्रीमती रश्मि अग्रवाल, अंशुल अग्रवाल सहित अनेक लोगों का विशेष सहयोग रहा। अंत में डॉ. उमाकांत गुप्ता ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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