जयपुर , फरवरी 09 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओं आंदोलन को प्रदेश के लिए शुभ संकेत बताते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद हैं कि राज्य सरकार इस पर ध्यान देगी और कोई रास्ता निकालेगी।

श्री गहलोत ने सोमवार को वीडियो जारी कर अपने बयान में कहा कि खेजड़ी बचाओं आंदोलन की शुरुआत बीकानेर से हुई हैं जो प्रदेश के लिए शुभ संकेत हैं और इसके लिए विश्नोई समाज सहित प्रदेशवासीबधाई के पात्र है क्योंकि बिना पर्यावरण के आने वाली पीढी को हम क्या जवाब देंगे।

उन्होंने कहा कि खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी तो अमर हो गई और उनकी प्रेरणा लेकर हम आगे बढ़ेंगे तभी पर्यावरण बचेगा। विकास अपने आप में महत्वपूर्ण रखता है लेकिन अगर विकास और पर्यावरण में संतुलन नहीं रहेगा तो स्थिति बिगड़ेगी और प्रदूषण फैलेगा। पर्यावरण को लेकर देश् और दुनिया में चर्चा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस समय पर्यावरण को लेकर स्थिति को पहचान लिया था और उन्होंने पर्यावरण की बात कही।

उन्होंने कहा कि अब धीरे धीरे लोगों को समझ आ रहा हैं लेकिन केवल बीकानेर में आंदोलन से काम नहीं चलेगा। धीरे धीरे प्रदेशवासियों को अपने क्षेत्र में संगोष्ठियां एवं चर्चा कर लोगों को समझाना होगा कि हम प्रदूषण से पर्यावरण को कैसे बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पर दबाव बनाना आवश्यक हैं और सरकार ने वादा भी किया हैं और उसे अपने वादे को निभाना भी चाहिए।

श्री गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए और जो पर्यावरण को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं उन्हें बुलाकर बातचीत करनी चाहिए तब जाकर हल निकलेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सोलर प्लांट लग रहे हैं जहां हजारों की तादाद में पेड़ कट रहे हैं। लाखों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर जहां सोलर प्लांट लग रहे हैं, वहां पेड़ कट रहे है। ऐसे में सरकार को नीति बनानी पड़ेगी कि हम किस प्रकार से किस हद तक जाये ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिस प्रकार कानून बनाने की बात की गई है और जल्द इस पर फैसला होना चाहिए ताकि धरने पर बैठे लोगों को संतुष्ट करना जरुरी हैं। सरकार ध्यान देगी और वह कोई न कोई रास्ता निकालेगी।

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