बेंगलुरु , फरवरी 02 -- कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी, संचार प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को गेमिंग, एनिमेशन एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को समर्थन देने में राज्य की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पहलों की तुलना में प्रदेश का दृष्टिकोण ज्यादा संरचित एवं प्रभावी है, इसलिए उभरती प्रौद्योगिकी पर केंद्र सरकार की पहल केवल फिजूलखर्ची है।

श्री खड़गे ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कर्नाटक आईटी, जैव प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और स्टार्टअप के क्षेत्र में लक्षित नीतियां बनाने में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा, "हमने वीएफएक्स, एनिमेशन एवं गेमिंग के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है, जिसमें रॉकस्टार गेम्स जैसी वैश्विक कंपनियां राज्य में ही बौद्धिक संपदा (आईपी) का निर्माण कर रही हैं।मुंबई को हालांकि बॉलीवुड की विरासत प्राप्त है लेकिन अधिकांश एनीमेशन और गेमिंग स्टूडियो का मुख्यालय या संचालन कर्नाटक से होता है, जिससे हमें तकनीकी एवं परिचालन संबंधी लाभ मिलता है।"उन्होंने कहा कि कर्नाटक की पांच वर्षीय नीति में विस्तारित वास्तविकता (एक्सआर) जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिसे अब वैश्विक मान्यता मिल रही है और ईस्पोर्ट्स को ओलंपिक एवं राष्ट्रमंडल द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई है। इस नीति में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (आईपी) के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया है जिससे स्टार्टअप एवं रचनाकारों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। श्री खड़गे ने स्टार्टअप के लिए राज्य की मजबूत समर्थन प्रणाली पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, "हम अपने उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, उपलब्धियों का आकलन करते हैं और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। इन कार्यक्रमों में 100 से अधिक लोग स्नातक हो चुके हैं। स्टार्टअप्स को हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, स्टोरेज एवं रेंडरिंग के लिए वित्तीय सहायता भी मिलती है जो गेमिंग और एनिमेशन स्टूडियो के लिए महत्वपूर्ण व्यय हैं।"श्री खड़गे ने कहा कि कर्नाटक बौद्धिक संपदा सृजन के लिए विशेष अनुदान देता है। घरेलू बौद्धिक संपदा के लिए व्यय लगभग पांच लाख रुपये है जबकि अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं को 20 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को सहयोग देने के लिए एबीजीसी का कुल 50 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनके पास वैश्विक स्तर पर विस्तार एवं प्रतिस्पर्धा करने के लिए संसाधन उपलब्ध हों।

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