नयी दिल्ली , मार्च 25 -- उभयलिंगी व्यक्तियों को कानूनी अधिकार देने और उनके हितों की रक्षा करने से संबंधित उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 को राज्यसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

सदन ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने से संबंधित विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है और राज्यसभा में पारित होने के साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गयी।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने विधेयक पर करीब तीन घंटे की चर्चा का जवाब देते हुए सदन को आश्वस्त किया कि इस विधेयक के प्रावधानों से उभयलिंगी व्यक्तियों की गरिमा और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में आर्थिक विकास को गति देने के साथ- साथ सामाजिक समावेशन को भी बढावा दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं से समावेशी समाज बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इन्हीं योजनाओं के आधार पर उभयलिंगी व्यक्तियों को सम्मान और गरिमामय जीवन देने की दिशा में निरंतर आगे बढ रही है । उन्होंने कहा कि सरकार इस समुदाय के लोगों के हर संभव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री कुमार ने कहा कि समाज की कठिनाईयों को समझकर उनका सही समाधान करना सरकार का फर्ज है। यह कानून गंभीर सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे लोगों की सुरक्षा और उनके हितों के संरक्षण के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उपयोग केवल उन्हीं लोगों के लिए है जिन्हें इसकी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक समुचित विचार विमर्श और संबंधित हितधारकों के साथ बातचीत के आधार पर लाया गया है और इसे प्रवर समिति में भेजे जाने की जरूरत नहीं है।

मंत्री ने कहा कि यह विधेयक उभयलिंगी व्यक्तियों को कानूनी अधिकार देता है और आम लोगों की तरह उनके अधिकार सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि इससे सभी नागरिक देश की प्रगति में बराबर की भागीदारी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि विधेयक में उभयलिंगी व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव खत्म करने तथा अपराधियों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान किये गये हैं।

सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री ने कहा कि विधेयक में बच्चों की सुरक्षा के भी विशेष प्रावधान किये गये हैं। विधेयक में उभयलिंगी व्यक्तियों की पहचान को सुनिश्चित किया गया है जिससे कि उनका लाभ सही व्यक्तियों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस समुदाय के लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विशेष रोजगार मेलों तथा परामर्श केन्द्रों का आयोजन कर रही है। इस समुदाय के लोगों के लिए विशेष हेल्पलाइन काम कर रही है।

उन्होंने विधेयक के प्रावधानों का विरोध करने पर विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनकी सरकारों ने इन समुदायों के लोगों का कभी संरक्षण नहीं किया।

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