लखनऊ , दिसम्बर 09 -- समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर में आधार कार्ड नहीं माना जा रहा है जबकि उसमें सब दस्तावेज है। इसका मतलब यह एसआईआर नहीं है। यह अंदर ही अन्दर एनआरसी है। जो एनआरसी का काम भाजपा खुलकर नहीं कर पा रही है वह एसआईआर के बहाने कर रही है।
मंगलवार को संसद में चुनाव सुधार पर चर्चा में भाग लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव सुधार तभी संभव है जब चुनाव निष्पक्ष होंगे। चुनाव सुधार के लिए चुनाव आयोग की नियुक्ति का तरीका बदला जाय। चुनाव आयोग की नियुक्ति निष्पक्ष और पारदर्शी हो। आयोग की नियुक्ति की जो व्यवस्था पहले थी भाजपा सरकार ने उसे बदल दिया। विपक्ष को लगना चाहिए कि नियुक्ति में उसकी भी भूमिका है। इसके साथ ही चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए।
उन्होंने कहा " चुनाव सुधार की प्रक्रिया चुनाव आयोग से शुरू होनी चाहिए। हम चाहते है कि वोटरलिस्ट एक हो और वोटर कार्ड भी सुधार हो। अखिलेश यादव ने कहा कि ईवीएम से चुनाव पर बहुत सवाल उठ रहे हैं। भारत ही नहीं पूरी दुनिया के अन्दर इलेक्ट्रानिक चीजों पर सवाल उठ रहे हैं। जो टेक्नालॉजी की बात कर रहे है वे भारत और जर्मनी, भारत और अमेरिका, भारत और जापान की तुलना कर लें, पता चल जायेगा कि हम कहां खड़े हैं। कई सम्पन्न देश जो तकनीक में भारत से कई गुना आगे हैं, अगर वे ईवीएम को नहीं स्वीकार कर रहें हैं तो यहां ईवीएम से वोटिंग क्यों हो रही है। जर्मनी जैसे देश में ईवीएम से वोटिंग असंवैधानिक माना जाता है। वहां बैलेट से वोट पड़ता है। हमारी मांग है कि बैलेट से मतदान हो।"अखिलेश यादव ने कहा कि बात रिफार्म की हो रही है। आखिर ये बात क्यों आई। जब कोई चीज अपने मूल स्वरूप में होती है तो उसे फार्म कहा जाता है। जब वह मूल फार्म खो जाती है तो डि फार्म कहा जाता है। उसी चीज को मूल फार्म में लाने का प्रयास रिफार्म होता है। उन्होंने कहा कि आज चुनाव सुधार की जरूरत क्यों पड़ी। हमारी चुनावी प्रक्रिया को खराब किसने किया। यहां चुनावी प्रक्रिया बाहर के लोगों ने नहीं अंदर के लोगों ने खराब की है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान खातों में पैसा देकर प्रभावित किया जा रहा है। बिहार में 10 हजार रूपया दिया गया। एक तरफ भाजपा पैसा देती है वहीं दूसरी तरफ अगर विपक्षी दल की सरकार कोई नीति लागू करती है तो भाजपा उस पर रोक लगवाती है। उन्होंने कहा कि चुनाव में मीडिया की भूमिका तय होनी चाहिए। चुनाव के समय पर सभी राजनीतिक दलों का मीडिया में बराबर स्थान नहीं मिलेगा तो चुनाव निष्पक्ष नहीं होगा। सरकारी हो या निजी मीडिया सभी दलों को बराबर स्पेस मिलना चाहिए।
श्री यादव ने कहा कि इधर देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया में दूसरों की छवि खराब करने के लिए पैसा खर्च किया जा रहा है। भाजपा के हजारों लोगों को लगाकर हजारों करोड़ रूपया नकारात्मक कैम्पेन के लिए खर्च करती है। भाजपा चुनाव में सोशल मीडिया पर निगेटिव प्रचार कराती है। इसी तरह से इलेक्ट्रोरल बांड का सबसे ज्यादा पैसा भाजपा को मिलता है। सबसे ज्यादा चुनाव खर्चा भाजपा के पास होता है। इलेक्ट्रोरल बांड का खेल सबको दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग इसमें सुधार लाए।
उन्होने कहा कि सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत भरोसा जगाने की है। ईवीएम हटाकर बैलेट से चुनाव हो। चुनाव धांधली पर तय समय सीमा में कार्रवाई हो। विपक्ष की शिकायतों की अनदेखी न हो। पक्षपात न हो। चुनाव आयोग निर्भीक हो। चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम न करे।
अखिलेश यादव ने कहा कि मऊ में अभी उपचुनाव नहीं घोषित हुआ है लेकिन वहां धांधली शुरू हो गयी है। चुनाव घोषणा से पहले ही 15 हजार वोट काट दिए गये है। इससे पहले 2022 के चुनाव में चिह्नित कर समाजवादी पार्टी के वोट काटे गये थे। हमने इसकी शिकायत की थी। आयोग ने एफीडेविट मांगे। समाजवादी पार्टी ने काटे गए नामों के एफिडेविट दिए लेकिन किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई।
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