कटक , जनवरी 23 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण आज भी राष्ट्र को प्रेरित कर रहा है।
उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से मातृभूमि के प्रति साहस, एकता और सर्वोच्च समर्पण के नेताजी के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए 'विकसित भारत -2047' के लक्ष्य के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया।
श्री राधाकृष्णन ने ओडिशा के कटक में नेताजी के जनस्थान संग्रहालय में 'पराक्रम दिवस' समारोह में कहा कि नेताजी ने न केवल भारत की स्वतंत्रता के लिए अथक संघर्ष किया, बल्कि उनके पास आजादी के बाद देश के शासन के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी सोच भी थी।
उपराष्ट्रपति ने नेताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भारत का महान सपूत बताया और कहा कि उनके जन्मस्थान का दौरा करना एक शानदार अनुभव रहा। उन्होंने आजाद हिंद फौज के गीत 'कदम कदम बढ़ाए जा' की प्रेरक धुनों को याद करते हुए कहा कि नेताजी ने भारत को एक मजबूत, शक्तिशाली और गरीबी मुक्त राष्ट्र के रूप में देखा था।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की सभ्यतागत यात्रा में ओडिशा का एक अनूठा स्थान है, जहाँ इतिहास, आध्यात्मिकता और संस्कृति का सहज मिश्रण मिलता है। उन्होंने प्राचीन काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक ओडिशा की प्रतिरोध की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह विरासत नेताजी के क्रांतिकारी पथ के साथ मजबूती से मेल खाती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक रिकॉर्ड किया गया संबोधन भी प्रसारित किया गया। उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री ने 2021 से नेताजी की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाकर और रॉस द्वीप का नाम बदलकर 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप' करके उन्हें उचित सम्मान दिया है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि पराक्रम दिवस केवल नेताजी की वीरता को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्र की सेवा में निडर होकर कार्य करने का आह्वान है।
उपराष्ट्रपति ने आजाद हिंद फौज (आईएनए) डाक टिकट गैलरी, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर एक प्रदर्शनी और नेताजी संस्कृति भवन का उद्घाटन किया।
श्री राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये संग्रहालय और प्रदर्शनियाँ युवा पीढ़ियों को भारत की स्वतंत्रता सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए अपार बलिदानों और कठिनाइयों को समझने में मदद करेंगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित