लखनऊ , मार्च 12 -- लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) में नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद ने मांग की है कि पॉजिटिव बैलेंस होने के बाद बिजली कनेक्शन बहाल करने की समय सीमा वर्तमान दो घंटे से घटाकर अधिकतम 10 मिनट की जाए। परिषद के अध्यक्ष तथा केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग की राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर यह जनहित प्रस्ताव सौंपा। प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को उनकी सहमति के बिना अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में रखा जा रहा है। परिषद के अनुसार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प चुनने का अधिकार है, लेकिन बिजली कंपनियां यह विकल्प नहीं दे रही हैं।
परिषद ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में नियामक आयोगों ने कनेक्शन बहाल करने की समय सीमा 10 से 15 मिनट तय की है। उदाहरण के तौर पर त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश में पॉजिटिव बैलेंस होने के 15 मिनट के भीतर बिजली कनेक्शन जोड़ने का प्रावधान है, जबकि उत्तर प्रदेश में दो घंटे की समय सीमा निर्धारित है।
प्रस्ताव में यह मांग भी की गई है कि यदि उपभोक्ता द्वारा रिचार्ज के बाद निर्धारित समय में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती है तो संबंधित बिजली कंपनी को उपभोक्ता को स्वतः मुआवजा देना चाहिए। परिषद ने यह भी कहा कि कंज्यूमर राइट्स रूल्स 2020 के तहत ग्रामीण और शहरी सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यदि मानकों के अनुसार बिजली उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो उपभोक्ताओं को स्वचालित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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