एमसीबी/मनेन्द्रगढ़ , फरवरी 02 -- छत्तीसगढ के सागर में डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के एक दल ने एशिया के सबसे बड़े गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क, मनेन्द्रगढ़ में शैक्षणिक भ्रमण एवं अध्ययन किया।

प्रोफेसर डॉ. के.के. प्रजापति एवं डॉ. एस. सेल्वकुमार के नेतृत्व में एम.टेक द्वितीय वर्ष के 27 छात्र-छात्राओं ने यहां संरक्षित लगभग 29 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री जीवाश्मों का सीधा अवलोकन एवं अध्ययन किया।

जिला जनसंपर्क अधिकारी से सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार इस अवसर पर पुरातत्व विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय ने दल को पार्क के विभिन्न जीवाश्मों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र गोंडवाना काल के समुद्री जीवन का महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों ने यहां पाए जाने वाले मोलस्का, यूरीडेस्मा एवं एकिलोपेक्टेन जैसे जीवाश्मों के वैज्ञानिक एवं भूवैज्ञानिक महत्व से अवगत कराया। साथ ही, वन विभाग द्वारा पत्थरों पर उकेरी गई समुद्री जीवों की कलात्मक आकृतियों ने भी छात्रों का ध्यान आकर्षित किया।

दल के छात्र-छात्राएं इतने प्राचीन जीवाश्मों को निकट से देखकर अत्यंत रोमांचित नजर आए। उन्होंने जीवाश्मों के निर्माण, संरक्षण प्रक्रिया एवं उनके ऐतिहासिक महत्व से जुड़े कई जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनके समाधान विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किए गए।

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