चेन्नई , अप्रैल 15 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को आयकर महानिदेशक (जांच) और केंद्रीय कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा 2021 और 2026 के चुनावी हलफनामोंमें घोषित संपत्तियों में कथित महत्वपूर्ण विसंगतियों की जांच की मांग करने वाली रिट याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने चेपॉक-ट्रिप्लिकेन विधानसभा क्षेत्र के निवासी आर. कुमारवेल (56) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई की, जहां से द्रमुक युवा मोर्चा के सचिव और मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन के पुत्र उदयनिधि लगातारदूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने सूचना एवं आयकर विभाग के महानिदेशक और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि अगर कोई झूठा हलफनामा साबित होता है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।

न्यायालय से कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए याचिकाकर्ता को चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए। दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने आयकर महानिदेशक और केंद्रीय कार्पोरेट मंत्रालय को निर्देश जारी करते हुए मामले को आगामी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

कुमारवेल ने मंगलवार को दायर की गयी अपनी याचिका में कहा कि उदयनिधि द्वारा 2021 और 2026 के दौरान दायर किये गये चुनावी हलफनामों के तुलनात्मक विश्लेषण से पहले घोषित संपत्तियों का गायब होना, ऋणों में अस्पष्ट भिन्नता, वित्तीय लेनदेन का गलत विवरण और हलफनामे में दिए गए खुलासे और कंपनी के दस्तावेजों के बीच विरोधाभास का पता चलता है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उदयनिधि ने 2021 में रेड जायंट मूवीज में 7.36 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी, लेकिन 2026 के उनके हलफनामे में इस निवेश का कोई जिक्र नहीं था। इसके बजाय, नवीनतम हलफनामे में दावा किया गया है कि उनकी पत्नी ने फिल्म निर्माण एवं वितरण से जुड़ी कंपनी में 2.63 करोड़ रुपये का निवेश किया था। याचिका के अनुसार, " इस परिवर्तन का पता या समर्थन किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, बिक्री, विनिवेश या पुनर्गठन के खुलासे से नहीं होता है। "इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उपमुख्यमंत्री के 2021 के चुनावी हलफनामे में यह खुलासाकिया गया था कि उन्होंने स्नो हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड को 11.06 करोड़ रुपये का ऋण दिया था, जबकि 2026 के हलफनामे में ऋण की राशि केवल 10 करोड़ रुपये बतायी गयी है और इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि शेष 1.06 करोड़ रुपये चुकाये गये, परिवर्तित किये गये या किसी अन्य तरीके से समायोजित किये गये।

कुमारवेल ने तर्क दिया कि किसी भी स्पष्टीकरण के अभाव से बयान अधूरा एवं भ्रामक हो जाता है और बताया कि स्नो हाउसलिंग द्वारा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के समक्ष 2021-22 के लिए दायर किये गये वैधानिक वित्तीय विवरण में उदयनिधि से 17.69 करोड़ रुपये के ऋण की प्राप्ति का खुलासा किया गया है, जिससे वास्तविकऋण राशि के संबंध में सीधा विरोधाभास उत्पन्न होता है।

उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि स्नो हाउसिंग ने 2021-22 के बाद लगातारतीन वर्षों तक अपने वैधानिक वित्तीय विवरण दाखिल नहीं किये हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री की आय 2020 से पहले के पांच वर्षों में लगभग 2.02 करोड़ रुपये थी, जो अपेक्षाकृत कम थी, जबकि बाद के वर्षों में आय में तीव्र वृद्धि हुई और यह 10.98 करोड़ रुपये से अधिक हो गयी।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा संपत्ति का गलत या अधूरा खुलासा न केवल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है बल्कि मतदाताओं के पूर्ण रूप से सूचित होने के मौलिक अधिकार का भी प्रत्यक्ष रूप से हनन है। याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे की व्यापक जांच करने के लिए डीजीआईटी (जांच) और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की।

मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

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