चेन्नई , अप्रैल 14 -- तमिलनाडु में मंगलवार को तमिल नव वर्ष पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।तमिल नव वर्ष हर साल तमिल महीने 'चिथिरै' के पहले दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग नये कपड़े पहनकर राज्य भर के विभिन्न मंदिरों में गये और पूजा-अर्चना की।

सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिर, प्राचीन कपालेश्वर मंदिर, वडपलानी मुरुगन मंदिर और भगवान मुरुगा के छह निवास स्थानों (आरुपदैवीडु), मदुरै मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, श्रीरंगम में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम में श्री रामनाथस्वामी मंदिर, चिदंबरम में श्री नटराज मंदिर, कुड्डालोर में पदालेश्वर मंदिर, तिरुवेंथीपुरम में श्री देवनाथस्वामी मंदिर और कुंभकोणम में श्री ओपिलियप्पन मंदिर तथा सारंगपाणि मंदिर सहित नवग्रह मंदिरों में जाकर विशेष प्रार्थना की।

लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को बधाई दी और खुशियां साझा कीं। बधाई संदेश भेजने के लिए लोगों ने सोशल मीडिया, फेसबुक और व्हाट्सएप का जमकर उपयोग किया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी और कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी राज्य के लोगों को तमिल नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

राजभवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, अपने संदेश में श्री आर्लेकर ने कहा, " हम सूर्य की गति पर आधारित कैलेंडर का पालन करते हैं और मेष राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ वर्ष की शुरुआत करते हैं।" उन्होंने कहा कि यह अवसर देश भर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे तमिलनाडु में तमिल नववर्ष, केरल में विशु, असम में बिहू और पंजाब में बैसाखी, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है।

राज्यपाल ने कहा, " जिस तरह ऋतुएं बदलती हैं, हमें भी समय-समय पर खुद को ढालना चाहिए और एक सामंजस्यपूर्ण, संतोषजनक और सुखी जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।" इस बीच, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, कनाडा और अन्य देशों में रहने वाले तमिलों ने भी अपनी परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार तमिल नववर्ष मनाया।

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