लखनऊ , मार्च 18 -- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले हफ़्ते मंत्रिमंडल की ओर से 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' को मंज़ूरी दिए जाने के बाद राज्य सड़क परिवहन निगम ने ग्रामीण इलाकों में बस कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़ निगम इस महीने के आखिर तक इस योजना का प्रचार-प्रसार पूरा कर लेगा और बसों को चलाने के लिए निजी ऑपरेटरों से आवेदन मांगेगा। आवेदनों की छंटनी का काम अप्रैल के मध्य तक पूरा हो सकता है।

इस योजना का मकसद हर ज़िला मुख्यालय से ज़िले के गांवों तक कम से कम दो बसें चलाना है। एक अधिकारी ने बताया, "इस योजना के तहत ज़िला मुख्यालय से चलने वाली बसों की अधिकतम संख्या पर कोई रोक नहीं है।"विभाग के अधिकारी ने बताया कि ये बसें आकार में छोटी होंगी। इनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और बैठने की क्षमता 28 यात्रियों की होगी।ये बसें रात में गांवों में ही रुकेंगी, जबकि सुबह प्रखंड और तहसील होते हुए 10 बजे तक ज़िला मुख्यालय पहुंच जाएंगी। किराया स्थानीय स्तर पर ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता वाली एक समिति तय करेगी।

दरअसल, प्रदेश के हजारों गांवों में जल्द ही सार्वजनिक परिवहन की सुविधा शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत ग्रामीण मार्गों पर मिनी बसें चलाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अप्रैल में चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि मई से ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संचालन शुरू कराया जा सके।

विभागीय सूत्रों के अनुसार उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए हैं कि इस योजना और सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम किया जाए और प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए। योजना के माध्यम से प्रदेश की 59,163 ग्राम पंचायतों को परिवहन सुविधा से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

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