लखनऊ , जनवरी 13 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त प्रतीक है। इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं, जिसके कारण उत्तर प्रदेश आज देश का प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि 'प्रगति' उस प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है, जिसकी नींव आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली। यह प्लेटफॉर्म आज डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सुदृढ़ करते हुए अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

उन्होने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब नीयत स्पष्ट हो, तकनीक का प्रभावी उपयोग हो और जवाबदेही तय हो, तो परिणाम स्वतः सामने आते हैं। यह केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में आगे बढ़ाया है। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।

योगी ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर 'प्रगति' के रूप में विकसित हुआ और मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं तथा सिस्टम रिफॉर्म के क्षेत्र में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूती मिली।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से 86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। प्रधानमंत्री द्वारा 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा की जाती है, जबकि कुल 3162 मुद्दों में से 2958 का समाधान किया जा चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता और कार्यकुशलता को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, व्यापक एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसी परियोजनाएं समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ी हैं। इन सभी परियोजनाओं के पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का सशक्त मंच प्रगति रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ की लागत की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से 2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं, जो कुल का 39 प्रतिशत हैं, पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 4.19 लाख करोड़ की लागत के 65 बड़े प्रोजेक्ट प्रगति के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से 26 परियोजनाएं पूरी होकर जनता को समर्पित की जा चुकी हैं, जबकि 39 परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। सरकार की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी अड़चनों का समाधान कर परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके चलते हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 515 मुद्दों में से 494 का समाधान कर लिया गया है, जो 96 प्रतिशत है। वहीं, प्रगति के अंतर्गत चिन्हित 287 मुद्दों में से 278 का समाधान (97 प्रतिशत) किया गया है। यह उच्च समाधान दर प्रशासनिक तत्परता, स्पष्ट जवाबदेही और निर्णायक नेतृत्व का प्रमाण है।

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