नैनीताल , दिसंबर 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग के 2,100 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए अपने महत्वपूर्ण फैसले में उनकी सेवाएं बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं सिर्फ इसलिए खत्म नहीं की जा सकती हैं कि सरकार ने वेतन भुगतान का मद बदल दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने बुधवार को एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। अदालत से आदेश की प्रति गुरुवार को मिली। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब तक संबंधित प्रभागों में काम और पद खाली हैं, तब तक कर्मचारियों को सेवा से नहीं हटाया जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से 17 नवम्बर 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें वन महकमे की उच्च स्तरीय कमेटी ने आउटसोर्स कर्मियों को हटाने और उनकी जगह नये लोगों को रखने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। इस आदेश के बाद आउटसोर्स कर्मियों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उनको इस आधार पर हटाया गया कि उनके वेतन भुगतान मद में परिवर्तन कर दिया गया था। अदालत सरकार के इस तर्क़ से सहमत नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने भी माना था कि इन कर्मियों की सेवाओं की विभाग को आवश्यकता है और वेतन भुगतान विवाद का शासन से बात करने का आश्वासन अदालत को दिया था। इसलिए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को उपरोक्त आधार पर नहीं हटाया जा सकता है। अदालत का मत है कि जब तक याचिकाओं का गुण दोष के आधार पर निर्णय नहीं हो जाता है तब तक याचिकाकर्ताओं की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी।
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