नैनीताल , मई 03 -- उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश में खाद (उर्वरक) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समस्या केवल खाद की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि वितरण व्यवस्था, बढ़ती कीमतों और प्रबंधन की खामियों से भी जुड़ी हुई है।
श्री आर्य ने रविवार कहा कि बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे फसलों की उत्पादकता पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर कालाबाजारी और जमाखोरी के चलते कृत्रिम संकट पैदा किया जा रहा है, जिससे किसानों को ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों और सरकारी वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था, लंबी कतारें और सीमित स्टॉक के कारण किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं डीएपी जैसी खाद की बढ़ती कीमतों ने किसानों की लागत को और बढ़ा दिया है, जिससे उनका मुनाफा लगातार घट रहा है। इस स्थिति में छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
श्री आर्य ने सरकार से मांग की कि बुवाई से पहले पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडार सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके। साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि खाद वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाया जाए, जिससे पारदर्शिता बढ़े और किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध हो सके। इसके अलावा जैविक और वैकल्पिक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट और गोबर खाद को बढ़ावा देने तथा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस गंभीर समस्या पर शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो किसानों की आजीविका पर गहरा संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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