नैनीताल , दिसंबर 15 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में राजमार्गों, सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाये जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन को आगामी 19 दिसम्बर को वर्चुअल रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी0 नरेन्दर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। न्यायमित्र अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली की ओर से कहा गया कि अदालत ने 17 अक्टूबर, 2023 को एक आदेश जारी कर प्रदेश सरकार को जिला स्तर पर सभी जिलाधिकारियों की अगुवाई में एक कमेटी गठित करने और सुनवाई के बाद अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे लेकिन आदेश का उचित अनुपालन नहीं किया गया है।
यही नहीं उच्चतम न्यायालय ने भी पिछले साल एक आदेश जारी कर सभी राज्य सरकारों को अतिक्रमणकारियों को उचित सुनवाई का मौका देने का निर्देश दिया था। उन्होंने आगे कहा कि कुछ अतिक्रमणकारियों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने तीन और सात दिन का नोटिस जारी कर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया है इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
दूसरी ओर सरकार की ओर से भी कहा गया कि राज्य सरकार ने आदेश का अनुपालन किया है। जिलों में कमेटियों का गठन किया गया है। सभी जिलाधिकारियों ने जवाबी हलफनामा दायर किया है। सभी को सुनवाई का मौका दिया जा रहा है। अंत में अदालत ने मुख्य सचिव को 19 दिसम्बर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है। दरअसल नैनीताल जनपद के पदमपुरी और खुटानी में सड़क किनारे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रभात गांधी ने उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखा था।
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