जयपुर , फरवरी 04 -- राजस्थान उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं ने शनिवार को न्यायिक कार्य दिवस घोषित करने के फैसले का विरोध करते हुए न्यायिक कार्य से स्वैच्छिक बहिष्कार की घोषणा की है।
राजस्थान उच्च न्यायालय की बैठक में दिसंबर 2025 में यह निर्णय लिया गया था कि वर्ष 2026 से हर महीने के दो शनिवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी, जिससे सालाना करीब 24 अतिरिक्त कार्य दिवस मिलेंगे और लंबित मामलों की संख्या कम हो सकेगी, लेकिन इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर और जोधपुर के प्रमुख वकील संघों ने संयुक्त रूप से शनिवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि बिना वकीलों की सहमति के शनिवार कार्य दिवस घोषित करना उनकी पारंपरिक कार्य संस्कृति, पारिवारिक जीवन और पेशेवर संतुलन को प्रभावित करेगा। इस कारण वे न्यायालय परिसर में शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं और कई मामलों में पैरवी से दूरी बनाए रखी है।
उच्च न्यायालय प्रशासन ने हालांकि नियमित वाद सूची जारी की है और अदालतें अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कार्य कर रही हैं। वकीलों का कहना है कि उनके प्रतिनिधियों ने पहले ही न्यायालय प्रशासन को अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं और जजों की समिति उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए गठित की गई थी, लेकिन अब तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है।
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