जयपुर , जनवरी 23 -- राजस्थान में राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने से जुड़े मामले में दायर दूसरी अवमानना याचिका को दुर्भावनापूर्ण और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
यह राशि राज्य कोष में जमा होगी और चरागाह एवं सार्वजनिक भूमि के संरक्षण में उपयोग की जाएगीमामला झुंझुनू जिले के चिड़ावा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों की चरागाह और सरकारी भूमि से जुड़े अतिक्रमण हटाने को लेकर दायर याचिका और उसके अनुपालन से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि 23 मई 2022 के आदेश के बावजूद प्रशासन ने चरागाहों से पूरे अतिक्रमण नहीं हटाए।
लेकिन न्यायालय ने पाया कि जिन लोगों के आवासीय हिस्सों पर अतिक्रमण हटाने का आदेश था, उनमें से कई ने पहले ही उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर कर रखी हैं, जिन पर स्थगनादेश प्रभावी हैं। ऐसे में प्रशासन उन घरों को नहीं तोड़ सकता। वहीं, प्रशासन ने न्यायालय में हलफनामा देकर बताया कि कुल 11 हजार 412 वर्गमीटर में से आठ हजार 38 वर्गमीटर क्षेत्र से अतिक्रमण हटा दिया गया है, शेष क्षेत्र पर स्थगनादेश होने के कारण कार्रवाई रोकी गई हैन्यायालय ने स्पष्ट किया कि अवमानना याचिका का उपयोग फैसलों के निष्पादन के लिए नहीं किया जा सकता, जबकि याचिकाकर्ता वस्तुतः इसी उद्देश्य से अदालत का दरवाज़ा खटखटा रहे थे। अदालत ने कहा कि यह "अवमानना अधिकारिता का दुरुपयोग" है और विवादित तथ्यों पर विस्तृत जांच इस प्रक्रिया में संभव नहीं।
न्यायमूर्ति सुदेश बंसल एवं न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की पीठ ने कहा कि चूँकि पहली अवमानना याचिका भी इसी आधार पर खारिज हो चुकी थी, इसलिए दूसरी याचिका दायर करना अनुचित और दुरुपयोग है। अदालत ने याचिका निरस्त करते हुए जारी नोटिस भी वापस ले लिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित