जयपुर , दिसम्बर 20 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में प्रसूता महिला अभ्यर्थियों के अधिकारों और स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण राहत देते हुए महिला कांस्टेबल भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा में असफल घोषित की गई एक प्रसूता महिला अभ्यर्थी को दोबारा शारीरिक परीक्षा का अवसर देने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति मुन्नुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने यह आदेश बाड़मेर निवासी 26 वर्षीय सुशीला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने महिला कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था और लिखित परीक्षा में सफल रही थीं। उनकी शारीरिक दक्षता परीक्षा 14 दिसंबर 2025 को निर्धारित थी, जबकि इससे पूर्व 29 नवंबर 2025 को उन्होंने शिशु को जन्म दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शांभवी मर्डिया ने अदालत को बताया कि प्रसव के तुरंत बाद शारीरिक परीक्षा में शामिल होना चिकित्सकीय रूप से कठिन था। इसके बावजूद भर्ती अधिकारियों ने उनके प्रतिवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया और उन्हें प्रसव के मात्र दो सप्ताह बाद परीक्षा में शामिल होना पड़ा, जिसमें वह दौड़ परीक्षा में असफल रहीं।

न्यायालय ने भर्ती विज्ञापन की शर्त संख्या 10 का उल्लेख करते हुए कहा कि गर्भवती और हाल ही में प्रसव कर चुकी महिलाओं को शारीरिक परीक्षा से अस्थायी छूट का प्रावधान है। न्यायालय ने इसे मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण से लागू करने की आवश्यकता बताई।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए कि प्रसव की तिथि से छह महीने के भीतर फिटनेस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर याचिकाकर्ता को पुनः शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। साथ ही, तब तक बाड़मेर जिले में महिला कांस्टेबल का एक पद रिक्त रखने के आदेश भी दिए गए हैं।

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