नैनीताल , फरवरी 12 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरोवर नगरी नैनीताल में झील के किनारे स्थित ऐतिहासिक दुर्गा लाल साह पुस्तकालय के जीर्णोद्धार में सरकारी धन के दुरुप्रयोग को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए निदेशक पर्यटन एवं कार्यदायी संस्था एशियन विकास बैंक (एडीबी) को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने दोनों से जवाब पेश करने को भी कहा है।
मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
न्यायमित्र अधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि नैनी झील के किनारे ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का पुस्तकालय है। नगर पालिका के इस पुस्तकालय का निर्माण वर्ष 1933-34 में समाजसेवी मोहन लाल साह द्वारा नैनीताल नगर पालिका को 05 हजार रुपये दान देकर किया गया था।
पुस्तकालय में महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ किस्म की पुस्तकें मौजूद हैं। इस पुस्तकालय से पूर्व में लाउडस्पीकर के माध्यम से समाचार प्रसारित किए जाते थे। वर्ष 2023 -24 में एडीबी द्वारा डेढ़ करोड़ की लागत से इसका जीर्णोद्धार किया गया। घटिया सामग्री के चलते मात्र डेढ़ वर्ष के भीतर इस पुस्तकालय की लकड़ी एवं शीशे उखड़ने लगे।
वर्तमान में लकड़ी एवं शीशों को रस्सी से बांधकर काम चलाया जा रहा है। जिससे किसी जनहानि की आशंका बनी हुई है। यह भी कहा गया कि इस संबंध में नगर पालिका की ओर से राज्य सरकार को पत्र लिखा गया लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जनहित याचिका में इस प्रकरण की जांच कराये जाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गयी है।
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