बिलासपुर , अप्रैल 08 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश में करंट लगने से हाथियों और अन्य वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य के अपर मुख्य सचिव (वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) को शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।

यह सुनवाई उस जनहित याचिका पर हुई, जिसे न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आज मामले की सुनवाई की और बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। याचिका में हस्तक्षेपकर्ता रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की ओर से अदालत में कई समाचार पत्रों की क्लिपिंग पेश की गईं। इन क्लिपिंग्स में हाल के दिनों में हुई कई घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

बताया गया कि 12 मार्च को रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में करंट लगने से दो हाथी के शावकों की मौत हो गई। इसके बाद 14 मार्च को सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में खेत में लगाए गए करंट की चपेट में आकर एक हाथी की जान चली गई। इसी महीने सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जंगली सुअर के शिकार के लिए लगाए गए अवैध बिजली तार की वजह से एक युवक की मौत हो गई। वहीं 26 मार्च को मैनपाट इलाके में बिछाए गए करंट वाले तार की चपेट में आकर एक युवक और एक लोमड़ी की भी मौत हो गई।

इसके अलावा कोरबा के सकोदा जंगल में 11 केवी बिजली तार की चपेट में आने से दो शावकों सहित एक मादा भालू की मौत होने की जानकारी भी दी गई।

न्यायालय ने इन सभी घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय ने कहा है कि शपथ पत्र में यह स्पष्ट किया जाए कि ये घटनाएं किन परिस्थितियों में हुईं और इन्हें रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मामले की अगली सुनवाई पांच मई तय की गई है।

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