जयपुर , दिसम्बर 20 -- राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने अभियोजन अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रतिवेदन (एपीएआर) में दोषसिद्धि की दर को आधार बनाये जाने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।

न्यायमूर्ति अशोक जैन की एकल पीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग और निदेशक अभियोजन, राजस्थान को नोटिस जारी करके निर्देश दिये हैं कि वे उच्चतम न्यायालय के उन फैसलों पर विचार करें, जिनमें कहा गया है कि अभियोजन अधिकारियों के काम का मूल्यांकन केवल दोषसिद्धि की दर के आधार पर नहीं किया जा सकता।

याचिका में कहा गया है कि किसी मामले में दोषसिद्धि या बरी होना कई कारणों पर निर्भर करता है। इनमें पुलिस जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों की उपलब्धता, गवाहों का सहयोग और न्यायिक प्रक्रिया शामिल हैं। इन सभी बातों पर अभियोजन अधिकारी का पूरा नियंत्रण नहीं होता।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संघ की ओर से उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया गया। इनमें यह स्पष्ट किया गया कि अभियोजन अधिकारी का मुख्य कर्तव्य न्यायालय की सहायता करना है, न कि हर हाल में दोषसिद्धि कराना।

याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी एपीएआर के नए प्रारूप को चुनौती दी गयी है। इस नये प्रारूप में पहली बार अभियोजन अधिकारियों के प्रदर्शन के आकलन के लिए दोषसिद्धि की दर का कॉलम जोड़ा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रावधान मनमाना है और न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

यह याचिका राजस्थान अभियोजन अधिकारी संघ की ओर से अध्यक्ष प्रतिभा पुरोहित के माध्यम से दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने न्यायालय में पक्ष रखा।

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