भोपाल , फरवरी 7 -- राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) भोपाल में 7 एवं 8 फरवरी 2026 को देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का दो दिवसीय सम्मेलन आज शनिवार को शुरू हो गया। "एकीकृत, दक्ष और जन-केंद्रित न्यायपालिका" विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में भारतीय न्याय व्यवस्था को आधुनिक, प्रभावी और नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने को लेकर व्यापक मंथन किया जा रहा है।

सम्मेलन का मार्गदर्शन भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश कर रहे हैं। सम्मेलन में राष्ट्रीय न्यायिक नीति की आवश्यकता, मुख्य न्यायाधीश की संस्थागत नेतृत्व भूमिका, न्यायिक कार्यप्रणाली में एकरूपता, पूर्वानुमेयता और जनविश्वास जैसे अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है।

जानकारी के अनुसार पहले दिन शनिवार को आयोजित सत्रों में न्यायिक नेतृत्व और राष्ट्रीय न्यायिक नीति की दृष्टि, रणनीतिक एवं डेटा-आधारित न्यायिक प्रशासन, लंबित मामलों की प्रोफाइल को समझना, दीर्घकालिक लंबित मामलों के रणनीतिक निपटारे, केस फ्लो एवं स्थगन नियंत्रण तथा सात वर्ष तक की सजा वाले आपराधिक मामलों की लंबितता कम करने के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही वैकल्पिक विवाद समाधान को मुख्यधारा में लाने, मध्यस्थता अधिनियम 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, ऑनलाइन विवाद समाधान और तकनीक आधारित निपटान प्रणालियों पर भी चर्चा हो रही है।

वही दूसरे दिन रविवार को "सुलभ, आधुनिक, समान और समावेशी न्याय प्रणाली" के निर्माण पर सत्र आयोजित होंगे, जिनमें तकनीक और प्रशासनिक उपायों के माध्यम से वित्तीय, भाषाई, भौगोलिक और प्रक्रियात्मक बाधाओं को तोड़ने, न्यायिक अवसंरचना के विस्तार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के समावेशी उपयोग तथा केस प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग पर मंथन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यायिक अवसंरचना को न्याय का अनिवार्य तत्व मानते हुए न्यायिक कर्मियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार, वर्चुअल सुनवाई की चुनौतियां, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण और केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ समन्वय जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य डिजिटल नवाचार के माध्यम से भाषाई और भौगोलिक सीमाओं को समाप्त करते हुए एक आधुनिक, समान और नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली के निर्माण के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता स्थापित करना है, ताकि देश के प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

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