नयी दिल्ली , जनवरी 16 -- उच्चतम न्यायालय ने वैधानिक अधिकारियों द्वारा लंबे समय से की जा रही उपेक्षा को देखते हुये शुक्रवार को दिल्ली में धरोहर और पुरातात्विक स्थलों के रखरखाव और संरक्षण की निगरानी करने की इच्छा जाहिर की । यह टिप्पणी लोधी काल के शेख अली 'गुमटी' पर अवैध अतिक्रमण से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जो लगभग 500 साल पुराना पुरातात्विक महत्व का मकबरा है।
गुमटी पर डिफेंस कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन (डीसीडब्ल्यूए) ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था, जबकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने इस स्थल पर एक अनाधिकृत कार्यालय और पार्किंग सुविधा का संचालन किया था। उच्चतम न्यायालय ने पिछले एक साल में अतिक्रमण हटाने के निर्देश देते हुए कई आदेश पारित किए हैं और जीर्णोद्धार प्रयासों की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
तेरह जनवरी को जब इस मामले की सुनवाई हुई, तो न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने यह दर्ज किया कि संबंधित हितधारकों द्वारा जीर्णोद्धार कार्य "सही भावना" के साथ किया गया है। पीठ ने अंतिम जीर्णोद्धार योजना को मंजूरी देते हुए कहा कि इसे पूरा होने में लगभग चार महीने लगेंगे।
न्यायालय को सूचित किया गया कि याचिकाकर्ता राजीव सूरी ने एक आवेदन दायर कर कार्यवाही के दायरे को बढ़ाने की मांग की है ताकि इसमें दिल्ली के अन्य विरासत स्थलों को भी शामिल किया जा सके जो विभिन्न वैधानिक प्राधिकरणों के अधीन है। इनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भी शामिल है, और जो कथित तौर पर उचित रखरखाव नहीं कर पा रहा है।
इस अर्जी में आरोप लगाया गया कि राजधानी में संरक्षण प्रयास "अस्थायी और चुनिंदा" प्रकृति के रहे हैं। न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि कई विरासत स्मारक उपेक्षित और असुरक्षित हैं और ऐसे स्थलों की मौजूदा सूचियाँ एक दशक से अधिक पुरानी हैं। याचिकाकर्ता ने इन संपत्तियों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए समयबद्ध सर्वेक्षण के निर्देश देने की मांग की।
न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण,ने वरिष्ठ अधिवक्ता शिखिल शिव सूरी के साथ न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, एएसआई के पास दिल्ली में 174 संरक्षित स्थल हैं, दिल्ली सरकार के पास 554, एमसीडी के पास 767 और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के पास लगभग 20 विरासत संपत्तियां हैं।
अद्यतन और समेकित जानकारी के अभाव को देखते हुए पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली छावनी बोर्ड और सीपीडब्ल्यूडी को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। इन जोड़े गये नये प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किये गये हैं। न्यायालय ने 21 जनवरी, 2025 से कई आदेश पारित कर डीसीडब्ल्यूए को गुमटी का कब्जा शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीडीओ) को सौंपने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने एमसीडी को अवैध रूप से कब्जा किए गए परिसर को खाली करने का भी निर्देश दिया और स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए डीसीडब्ल्यूए पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
न्यायालय को 14 मई को सूचित किया गया कि डीसीडब्ल्यूए ने भूमि एवं परिवहन विभाग (एल एंड डी ओ) को शांतिपूर्ण कब्जा सौंप दिया है। हालांकि, आरोप है कि एमसीडी ने परिसर को क्षतिग्रस्त हालत में खाली किया, जहां कूड़ा-करकट, टूटी दीवारें और बिजली नहीं थी।
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