अलवर , मार्च 21 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का में संकटग्रस्त बाघ आवास (सीटीएच) को लेकर अलवर के खान मालिक एवं कई व्यवसाय से जुड़ी 10 यूनियनों ने उच्चतम न्यायालय में सीटीएच को लेकर चल रही प्रक्रिया का स्वागत किया है ।

खदान संघ के जिला सचिव सुबोध गोयल ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा कि हम न्याय में पूरी तरह विश्वास रखते हैं और जो प्रक्रिया चल रही है उसका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक भ्रांति फैलाई जा रही थी कि सीटीएच के क्षेत्र में बदलाव इसलिए किया जा रहा है की खदानें चालू करनी हैं।

श्री गोयल ने कहा कि इससे खदानें शुरू करने का कोई मतलब नहीं है। सिर्फ सीटीएच का निर्धारण करना है, क्योंकि वर्ष 2007 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने पहली बार इसका निर्धारण किया था, जिसकी हमें जानकारी नहीं थी। उस वक्त भी इस सीटीएच को लेकर हम पर किसी भी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी, लेकिन अब पाबंदियां लगा दी गयी हैं, जबकि सीटीएच का मामला वर्ष 2007 से ही चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इसको लेकर काफी बदलाव है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में बताया कि उस समय जो अधिसूचना जारी हुई थी, उससे हमारे हित प्रभावित नहीं थे, लेकिन उसके बाद उच्चतम न्यायालय में वाद दायर किये गये, जिसमें उच्चतम न्यायालय द्वारा एक केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) गठित की गयी और उसमें यह बताया गया कि अभयारण्य से ज्यादा सीटीएच क्षेत्र बन गया है इसलिए इसका सीमांकन जरूरी है।

सीटीएच को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार और उच्चतम न्यायालय में न्याय संगत प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उसमें कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के चलते व्यवधान पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका निर्धारण होने के बाद भविष्य में किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। अब नयी अधिसूचना जारी होने के बाद यह संज्ञान में आया है और सरकार इसमें अपना पक्ष रख रही है। अब उच्चतम न्यायालय सभी आपत्तियों को सुनेगा और उनका समाधान करेगा।

श्री गोयल ने बताया कि कुछ संस्थाओं द्वारा इसमें भ्रामक प्रचार करके बरगलाया जा रहा है, जबकि यह सैकड़ों उद्योगों से जुड़ा हुआ मामला है। अलवर के विकास और पर्यटन को लेकर भी यह बड़ा मुद्दा है।

झिरी मार्बल एसोसिएशन के गोपाल सिंह नरूका ने बताया कि यहां सबसे अधिक खदानें बंद हो गयीं, जिससे हजारों बेरोजगार हो गये हैं। यहां पर काफी लोगों का पैसा निवेश किया हुआ है। खदानें बंद होने के बाद यह इलाका पूरी तरह पिछड़ता जा रहा है।

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