नयी दिल्ली , दिसंबर 15 -- उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में पत्रकार महेश लांगा को अंतरिम ज़मानत दे दी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने श्री लांगा को कड़ी शर्तों के अधीन यह राहत दी।

न्यायालय ने अंतरिम ज़मानत में यह शर्त लगाई है कि श्री लांगा अपने खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित कोई लेख नहीं लिखेंगे। इसके साथ ही पीठ ने विशेष अदालत को निर्देश दिया कि शेष नौ गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए मुकदमे की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर की जाए।

न्यायालय ने पत्रकार को मुकदमे में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि वह इस आधार पर कोई स्थगन नहीं मांगेंगे कि कार्यवाही को रद्द करने की उनकी याचिका लंबित है। प्रवर्तन निदेशालय को इन निर्देशों के अनुपालन पर 'यथास्थिति रिपोर्ट' दाखिल करने को कहा गया है और मामले की अगली सुनवाई के लिये 6 जनवरी, 2026 की तिथि निर्धारित की गयी है।

गौरतलब है कि श्री लांगा को कथित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) धोखाधड़ी के संबंध में 2024 में गुजरात पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और बाद में अन्य संबंधित मामलों में भी उन पर मामला दर्ज किया गया था। बाद में ईडी ने जीएसटी मामले को 'आधार अपराध' मानते हुए उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक मामला दर्ज किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल श्री लांगा की ओर से पेश हुए और धन शोधन मामले में ज़मानत पर जोर दिया। महाधिवक्ता तुषार मेहता ने इस याचिका का पुरजोर विरोध किया और आरोप लगाया कि पत्रकार जबरन वसूली में शामिल थे।

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