नयी दिल्ली , फरवरी 09 -- उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित व्यक्तियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच पूरी करने की समय सीमा सोमवार को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है।

न्यायालय ने यह फैसला प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों के एक नए समूह को शामिल किए जाने के मद्देनजर लिया है। पीठ ने निर्देश दिया कि चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को जांच पूरी करने और अंतिम निर्णय लेने के लिए 14 फरवरी के बाद अतिरिक्त समय दिया जाए।

न्यायालय ने उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग को 8,505 ग्रुप बी अधिकारियों की एक सूची सौंपी है, जिन्हें प्रशिक्षित कर इस पुनरीक्षण कार्य में तैनात किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पात्र मतदाताओं को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने की आशंका जताई और न्यायालय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऐसी कोई चूक न हो।

पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग के पास मौजूदा ईआरओ और सहायक ईआरओ को बदलने या उपयुक्त पाए जाने पर उन्हें पद पर बनाए रखने का विवेकाधिकार होगा।

न्यायालय ने कहा कि इन ग्रुप बी अधिकारियों के बायोडाटा की संक्षिप्त जांच के बाद उन्हें माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में कार्य करने के लिए एक या दो दिन का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल ईआरओ की सहायता करने तक सीमित होगी और अंतिम निर्णय केवल ईआरओ का ही होगा।

इस बात पर जोर देते हुए कि प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़नी चाहिए, न्यायालय ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के अवरोध की अनुमति नहीं देगा और संविधान सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है।

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