चंडीगढ़ , फरवरी 02 -- उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को एक हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले में जमानत दी।
पंजाब सतर्कता ब्यूरो द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोपों के बाद श्री मजीठिया पिछले सात महीनों से नाभा जेल में बंद थे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने श्री मजीठिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर और पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। न्यायालय ने इस बात को ध्यान में रखा कि जांच रिपोर्ट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। इसने 2007-2017 की जांच अवधि और 2025 में एफआईआर दर्ज होने के बीच महत्वपूर्ण देरी पर भी ध्यान दिया। पीठ ने 2022 के एनडीपीएस मामले में श्री मजीठिया की पिछली जमानत का भी हवाला दिया और कहा कि उस जमानत के खिलाफ राज्य सरकार की चुनौती को न्यायालय ने 2025 में खारिज कर दिया था।
जमानत देते समय न्यायालय ने यह अनुमति दी कि अभियोजन पक्ष निचली अदालत में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कड़ी शर्तें लगाने का अनुरोध कर सकती है।
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