भोपाल , दिसंबर 25 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'साइबर सुरक्षित भारत' विज़न को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रणाली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में शुरू की गई है। इसके साथ ही दिल्ली के बाद मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था प्रभावी की गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, ग्वालियर में आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ई-जीरो एफआईआर की पहली प्रति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई।

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था विशेष रूप से एक लाख रुपये से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू होगी। इसका उद्देश्य क्षेत्राधिकार की बाधाओं को समाप्त कर साइबर अपराधों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह प्रणाली नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम को एकीकृत करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैसे स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाया गया, वैसे ही साइबर स्वच्छता को भी समाज की संस्कृति बनाना आवश्यक है। उन्होंने साइबर अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया है।

प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह प्रणाली नागरिकों को तेज, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम न्याय प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साइबर अपराध के बाद के पहले दो घंटे को 'गोल्डन ऑवर' मानते हुए, ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से बैंक खातों को समय रहते फ्रीज कर पीड़ित की राशि सुरक्षित करने में सहायता मिल सकेगी।

मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि इस प्रणाली से साइबर अपराधों में त्वरित जांच, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और पीड़ितों को शीघ्र राहत संभव हो सकेगी। यह पहल तकनीक के माध्यम से न्याय को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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