तेहरान , दिसंबर 15 -- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफ़ेल ग्रॉसी ने कहा है कि संगठन ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों तक पहुंच नहीं बना सका है। उधर ईरान ने कहा है कि वह 'अपने परमाणु संयंत्रों और वैज्ञानिकों की सुरक्षा' से जुड़ी चिंताओं के कारण आईएईए पर भरोसा नहीं कर सकता।
रूस की समाचार एजेंसी रिया नोवोस्ती ने श्री ग्रॉसी के हवाले से कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हालात सामान्य होने के बाद निरीक्षक कुछ परमाणु इकाइयों पर गये थे, लेकिन जिन परमाणु ठिकानों को उस समय अमेरिकी हमले में नुकसान हुआ था वहां वे अब भी नहीं पहुंच पाये थे।
रिपोर्ट में श्री ग्रॉसी के हवाले से कहा गया, "हमें उन्हीं ठिकानों पर जाने दिया गया है जिन पर हमला नहीं हुआ था। नतांज़, इस्फ़ाहन और फोर्डाें तक पहुंचना और भी ज़्यादा अहम है क्योंकि इन ठिकानों पर काफ़ी मात्रा में परमाणु सामग्री और उपकरण मौजूद हैं।"उल्लेखनीय है कि इजरायल और ईरान के बीच जून 2025 में तनाव बढ़ गया था और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले किये थे। इजरायल ने ईरान पर एक खुफिया परमाणु कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाया था, जिसे ईरान ने सिरे से ख़ारिज किया है। इजरायल ने इस दावे के साथ 13 जून को ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला बोला था। इसके नौ दिन बाद अमेरिका ने भी 22 जून को नतांज़, इस्फ़ाहन और फोर्डाे में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किये थे।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जून के आखिर में एक संसदीय कानून के तहत आईएईए के साथ अपना सहयोग निरस्त कर दिया था। ईरान ने कहा था कि एजेंसी इज़रायली और अमेरिकी हमलों की निंदा करने में असमर्थ रही है। इसके साथ ही ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों और वैज्ञानिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं का हवाला भी दिया था।
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