वॉशिंगटन , फरवरी 11 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता इस बात की संभावनाओं का पता लगाने के लिये जारी रहेगी कि क्या परमाणु हथियारों को लेकर कोई समझौता किया जा सकता है। यह बयान उन्होंने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के तुरंत बाद दिया।

श्री ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, "मैंने अभी-अभी इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात पूरी की है। ईरान के साथ वार्ता जारी रखने के अलावा कोई निर्णायक सहमति नहीं बनी, ताकि यह देखा जा सके कि कोई समझौता संभव है या नहीं। यदि समझौता हो सकता है, तो मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि यही मेरी प्राथमिकता होगी। यदि ऐसा नहीं हो पाता, तो हमें देखना होगा कि आगे क्या परिणाम निकलता है।"उन्होंने कहा कि बैठक में गाजा और पूरे क्षेत्र में हो रही प्रगति पर भी चर्चा हुई। श्री नेतन्याहू बुधवार सुबह व्हाइट हाउस के दक्षिणी लॉन से होते हुए पहुंचे और बिना किसी संवाददाता सम्मेलन या आधिकारिक बयान के रवाना हो गये। दोनों नेताओं के बीच यह श्री ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान सातवीं मुलाकात थी, जो करीब तीन घंटे तक चली।

बैठक से पहले श्री नेतन्याहू ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की और औपचारिक रूप से "शांति बोर्ड" का सदस्य बनने पर सहमति दी, जिसे इजरायली संसद में विवादास्पद पहल बताया जा रहा है।

अमेरिका रवाना होने से पहले श्री नेतन्याहू ने कहा था कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के समक्ष ईरान से वार्ता के सिद्धांतों को रखेंगे, जो न केवल इजरायल बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा चाहने वालों के लिए अहम हैं। श्री नेतन्याहू के कार्यालय के अनुसार, वह चाहते हैं कि वार्ता में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं लगायी जाएं और हमास तथा हिजबुल्लाह जैसे संगठनों से उसके संबंधों में कटौती शामिल हो।

श्री ट्रंप ने मंगलवार को फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में कहा था, "समझौता अच्छा होना चाहिए। कोई परमाणु हथियार नहीं, कोई मिसाइल नहीं।"इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तेहरान में 1979 की इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि पश्चिम द्वारा खड़ी की गयी "अविश्वास की दीवार" अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता में बाधा बन रही है। उन्होंने दोहराया कि ईरान अत्यधिक मांगों और आक्रामकता के आगे कभी झुकेगा नहीं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रूस टुडे से कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान और अमेरिका जुलाई 2015 में हुए संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) से भी बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं, लेकिन ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय गठबंधनों पर बातचीत नहीं करेगा।

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