तेल अवीव , अप्रैल 03 -- ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने को लेकर इजरायली जनता के समर्थन में 'लगातार गिरावट' आयी है। एक नये सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है।
तेल अवीव विश्वविद्यालय से संबद्ध थिंक टैंक 'इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज' (आईएनएसएस)द्वारा गुरुवार को जारी सर्वेक्षण के अनुसार, ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने तक अभियान जारी रखने के लिए सार्वजनिक समर्थन कम होता जा रहा है। सैन्य अभियान के शुरुआती दिनों में जहां 69 प्रतिशत उत्तरदाताओंका अनुमान था कि शासन को भारी नुकसान होगा, वहीं आज केवल 43.5 प्रतिशत ऐसा सोचते हैं।
सर्वेक्षण में कहा गया है, " ईरान में अभियान के परिणामों और इसे समाप्त करने के उद्देश्य के संबंध में सार्वजनिक दृष्टिकोण अब बदल रहा है। जनता अब ईरान के परमाणु प्रोजेक्ट, मिसाइल शस्त्रागार और अयातुल्ला शासन को होने वाले संभावित नुकसान के आकलन में अधिक सतर्क है। "इसी तरह, ईरान के परमाणु प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचने की उम्मीद भी शुरुआती 62.5 प्रतिशत से गिरकरअब 48 प्रतिशत रह गयी है।
बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को भारी नुकसान पहुंचने का अनुमान लगाने वालों की संख्या भी 73 प्रतिशत से घटकर 58.5 प्रतिशत हो गयी है। शासन को उखाड़ फेंकने तक युद्ध जारी रखने का समर्थन भी शुरुआती दिनों के 63 प्रतिशत से घटकर अब 45.5 प्रतिशत पर आ गया है। उत्तरी मोर्चे पर, जनता इस सवाल पर बंटी हुई है कि क्या हिजबुल्लाह को निहत्था किया जा सकता है।
इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) पर जनता का भरोसा 77 प्रतिशत के साथ ऊंचा बना हुआ है, जबकि सरकार पर भरोसा केवल 30 प्रतिशत है, जिसमें गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण देखा जा रहा है।
इसके अलावा, 63 प्रतिशत यहूदी आबादी का मानना है कि सेना प्रमुख की यह चेतावनी सही थी कि और सैनिकों की भर्ती किये बिना विभिन्न मोर्चों पर आईडीएफ को सौंपे गये मिशन सेना को 'भीतर से ध्वस्त' कर सकते हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर केवल 36 प्रतिशत इजरायली जनता का उच्च भरोसा है, जबकि 62 प्रतिशत लोग उन पर कम भरोसा रखते हैं।
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