तेहरान/मॉस्को , अप्रैल 24 -- ईरानी दूत काजेम जलाली ने कहा है कि ईरान मामलों को कूटनीति से सुलझाना पसंद करेगा लेकिन अगर बात बिगड़ती है, तो वह युद्ध जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के कई मर्तबा धोखा खाने के बावजूद कभी भी कूटनीति का साथ नहीं छोड़ने की भी बात कही।
श्री जलाली ने गुरुवार देर रात बताया, "इस्लामिक गणराज्य ईरान की सामान्य नीति यह है कि अगर दूसरा पक्ष बातचीत करने को तैयार है, तो हम बातचीत करेंगे। अगर वे युद्ध चाहते हैं, तो हम लड़ेंगे।"मॉस्को में ईरानी राजदूत ने दावा किया कि ईरान ने कभी 'धोखा नहीं दिया' या बातचीत की मेज छोड़ी। उन्होंने अमेरिका पर 28 फरवरी को और उससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में ठीक ऐसा ही करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति के रिकॉर्ड में संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) को फाड़ना शामिल है और जब बातचीत चल रही थी, तब हम पर दो बार हमले किए गए।"उल्लेखनीय है कि जेसीपीओए आमतौर पर ईरान परमाणु समझौते के रूप में जाना जाता है। यह 14 जुलाई 2015 को वियना में ईरान और पी5 और (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य-चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी) तथा यूरोपीय संघ के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता है।
उन्होंने कहा, "अगर वे इस चलन को जारी रखना चाहते हैं, तो यह स्वाभाविक है कि ईरान लड़ेगा। लेकिन अगर उनका इरादा बातचीत का है, तो हम स्थायी शांति स्थापित करने, ईरान के अधिकारों को सुरक्षित रखने और अपने नुकसान की भरपाई करने को ठोस गारंटी के साथ व्यवस्थित रूप से बातचीत के लिए तैयार हैं।"श्री ट्रम्प ने पहले ईरान के साथ संघर्ष विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सभी मुख्य मुद्दों पर तेहरान से 'एकजुट प्रतिक्रिया' का इंतजार करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि देश टूटा हुआ, विभाजित और नेतृत्वहीन है क्योंकि इसकी कमान संरचना बुरी तरह से कमजोर हो चुकी है और कोई केंद्रीय नेतृत्व नहीं है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने श्री ट्रम्प के इन दावों का खंडन करते हुए संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ के साथ मिलकर कहा कि जब राष्ट्रीय हित की बात आती है, तो 'कट्टरपंथियों' और 'नरमपंथियों' के अलग-अलग खेमे नहीं होते बल्कि केवल 'ईरानी और क्रांतिकारी' होते हैं। उन्होंने संकल्प दोहराया कि देश की 'अटूट एकता' हमलावर को उसके कृत्यों पर पछतावा करने को विवश कराएगी।
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