नयी दिल्ली , फरवरी 28 -- भारतीय निर्यातकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष ने स्थापित वैश्विक व्यापारिक मामल की राहों को बाधित करना शुरू कर दिया है।निर्यातकों का कहना है कि हवाई मार्गों में बदलाव हो रहे हैं तथा लाल सागर और प्रमुख खाड़ी जलडमरूमध्यों के माध्यम से समुद्री व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

भारतीय निर्यात इकाइयों के शीर्ष मंच फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष राल्हन ने शनिवार को एक बयान में कहा कि यदि अंतर्राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स के मार्गों में परिवर्तन लंबे समय तक जारी रहता है, तो माल को केप ऑफ गुड होप (आशा अंतरीप) के रास्ते भेजना पड़ सकता है, जिससे यूरोप और अमेरिका के लिए माल पहुंचाने के समय में अनुमानित 15-20 दिन की वृद्धि होगी। इससे माल ढुलाई लागत में वृद्धि होगी और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ेगा।

फियो अध्यक्ष का कहना है कि इसके अलावा, बढ़े हुए भू-राजनीतिक जोखिम के कारण आमतौर पर समुद्री बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं, जिससे निर्यातकों के लिए लेनदेन लागत और बढ़ जाती है। एफआईईओ ने कहा कि लंबे समय तक व्यवधान वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दबाव डाल सकता है, जिसका इनपुट लागत और मुद्रा स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, जिसमें रुपये पर दबाव भी शामिल है।

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