वाशिंगटन , फरवरी 28 -- संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार की रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद एक संबोधन में कहा कि इस कार्रवाई का उद्येश्य वहां की 'आतंकवादी सरकार से' अमेरिका और उसके सहयोगियों की रक्षा करना है और उस सरकार को हटा कर वहां की शासन व्यवस्था ईरान की जनता को सौंपना है।

उन्होंने ईरानी सेना को हथियार डालने या तबाही के लिए तैयार रहने की अपील करते हुए साफ साफ कहा कि अमेरिका ईरान को कभी परमाणु हथियारों से लैस नहीं होने देगा और उसको ऐसी लम्बी दूरी की मिसाइलें नहीं बनाने देगा जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने ईरान की मौजूदा सरकार को -कुछ क्रूर और खतरनाक लोगों का गिरोह बताते हुए कहा कि वहां की -आतंकवादी सरकार' चार दशकों से अधिक समय से 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाती रही है और जगह जगह अमेरिकी सौनिकों, सैन्य तथा वाणिज्यिक पोतों पर हमले किये हैं तथा अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया है 1उन्होंने ईरान की जनता से सुरक्षित घरों में बने रहने की सलाह देते हुए कहा है कि इस अभियान के खत्म होने के बाद ईरानी जनता को अपनी सरकार अपने हाथ में संभालने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, 'अमेरिकी सेनाओं ने कुछ समय पहले ईरान में बड़ी कार्रवाई शुरू की है। हमारा मकसद ईरान के शासकों की ओर से आने वाले खतरों को खत्म करके अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की गतिविधियां अमेरिका, अमेरिकी सैनिकों, विदेशों में उनके अड्डों और दुनियाभर में अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा पैदा करती हैं। पिछले 47 सालों से ईरान के शासक 'अमेरिका मुर्दाबाद' का नारा लगाते आ रहा है और अमेरिका, हमारे सैनिकों और कई देशों में बेगुनाह लोगों को निशाना बनाकर खून-खराबे और बड़े पैमाने पर हत्याएं कराने का एक अंतहीन अभियान चला रखा है।

उन्होंने इसी संदर्भ में इस शासन के प्रारंभिक दौर में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर 444 दिनों कब्जा कर लोगों को बंधक बनाने की कार्रवाई,1983 में बेरूत में नौसैनिक बैरक पर बमबारी में 241 अमेरिकी सैनिकों की मौत, 2000 में अमेरिकी नौसेना के पोत पर हुए हमले , इराक में हमलों में अमेरिकी सेनाओं के सैकड़ों लोगों को हताहत किये जाने का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ईरान की मौजूदा सरकार के एजेंटों ने हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सेनाओं के साथ-साथ अमेरिकी नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों और अंतराष्ट्रीय समुद्री मागोँ पर अनगिनत हमले किए हैं।

श्री ट्रम्प ने कहा, ' यह बड़े पैमाने का आतंक है और हम इसे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसलिए मैंने ईरान पर युद्ध की घोषणा की।... ईरान पर हमलों का मकसद "अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है।"अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकल्प के साथ कहा, ' ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना सकता। हम उनके... मिसाइल उद्योग को खत्म कर देंगे।'अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के मौजूदा शासकों ने "लेबनान से लेकर यमन और सीरिया से लेकर इराक तक सरकार ने आतंकवादी मिलिशिया को हथियार दिए हैं। प्रशिक्षण दिया है और धन दिया है, जिन्होंने धरती को खून से भिगो दिया है।"उन्होंने हमास द्वारा " 7 अक्टूबर" के नाम से चर्चित 2023 के हमले का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के सहयोग से चल रहे इस संगठन ने इजराइल पर भयानक हमले किए, जिसमें 46 अमेरिकियों सहित 1,000 से अधिक बेगुनाह लोगों को मार डाला और हमारे 12 नागरिकों को बंधक बना लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की क्रूर दुनिया इससे पहले कभी नहीं देखी गयी थी।

श्री ट्रम्प ने कहा, ' ईरान दुनिया में एक नंबर की आतंकी सरकार है। हाल ही में उसने विरोध-प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर अपने हजारों नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने कहा, " अमेरिका , खासकर मेरी सरकार की हमेशा से यह नीति रही है कि इस आतंकवादी सरकार के पास कभी भी परमाणु हथियार न हो। मैं इसे फिर से कहूंगा। उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकता।'अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर पिछले जून में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कार्रवाई में फोर्डो, नतांज और इस्फहान के परमाणु ठिकानों का काम खत्म कर दिया। उस हमले के बाद अमेरिका ने ईरान सरकार को 'बुरी नीयत से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश न करने की हिदायत दी थी और उसके साथ समझौता करने की कई बार कोशिश की-- "पर वे बस बुराई में लगे रहना चाहते थे।'श्री ट्रम्प ने कहा कि जैसा कि ईरान दशकों पहले से करता आ रहा था, उसने समझौता करने से मना कर दिया, परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने का हर मौका ठुकरा दिया और परमाणु कार्यक्रम को बहाल करने तथा लंबी दूरी के प्रक्षेपास्त्र बनाने की कोशिश की । उन्होंने कहा कि ईरान के प्रक्षेपास्त्र 'अब यूरोप में हमारे बहुत अच्छे दोस्तों और साथियों, विदेशों में तैनात हमारे सैनिकों के लिए खतरा बन सकते हैं और जल्द ही अमेरिकी होमलैंड तक पहुंच सकते हैं। "अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ' और हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। 'उन्होंने कहा कि जरा कल्पना कीजिए ,अगर उनके पास अपना संदेश देने के लिए (धौंस जमाने के लिए) कभी परमाणु हथियार हो जाए , तो वह सरकार कितनी दुस्साहसी होगी।" उन्होंने कहा कि इसी लिए अमेरिका ईरान की कट्टरपंथी तानाशाही खतरा बनने से रोकने के लिए एक बड़ा और लगातार अभियान चला रहा है।

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