नयी दिल्ली , अप्रैल 11 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयले के अवैध खनन, चोरी, अवैध परिवहन और बिक्री, जाली दस्तावेजों के उपयोग और जबरन वसूली के संबंध में चिन्मय मंडल और किरण खान सहित पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 54 प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की गयी थी। ये शिकायतें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने दर्ज कराई थी।
जांच से पता चला कि आरोपी और उनके सहयोगी दुर्गापुर-आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय एक संगठित कोयला सिंडिकेट का हिस्सा थे। यह समूह गैर-कानूनी तरीके से प्राप्त कोयले और झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से लाये गये कोयले के व्यापार में शामिल था। वे वैध वितरण आदेश धारकों, ट्रांसपोर्टरों और कोयला खरीदारों से धन उगाही भी कर रहे थे। कोयला उठाने और परिवहन की अनुमति देने के लिए अवैध वसूली की जाती थी, जिसे अक्सर हैंडलिंग शुल्क या दान के रूप में दिखाया जाता था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, वसूली की दर लगभग 275 रुपये प्रति टन से 1,500 रुपये प्रति टन के बीच थी, जो नीलाम किये गये कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत था। इस जबरन वसूली के कारण आवंटित कोयले का एक बड़ा हिस्सा उठाया नहीं जा सका, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड को भारी वित्तीय हानि हुई। अनुमान है कि पिछले पांच वर्षों में केवल जबरन वसूली के माध्यम से ही 650 करोड़ रुपये से अधिक धन जुटाया गया।
जांच के दौरान, आरोपियों और उनके सहयोगियों से जुड़े कई परिसरों की तलाशी ली गई। अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, व्हाट्सएप चैट, कोयला उठाने के रिकॉर्ड, वसूली की रसीदें और बैंक खातों के विवरण जब्त किये। 21 नवंबर, 2025 और 3 फरवरी, 2026 को की गई छापेमारी में लगभग 17.57 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक शेष और कीमती सामान के साथ-साथ कोयले और कोक का बड़ा भंडार जब्त किया गया।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने अपराध की कमाई को वैध आय के रूप में दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनियों और फर्मों का उपयोग किया। बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि आपस में जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के बीच बड़ी मात्रा में नकदी जमा की गई और धन का हस्तांतरण हुआ। इसके अतिरिक्त जांच में पश्चिम बंगाल सरकार के कुछ अधिकारियों और स्थानीय राजनैतिक कार्यकर्ताओं को कथित रूप से रिश्वत देने के साक्ष्य भी मिले हैं, ताकि कोयले की आवाजाही को सुगम बनाया जा सके और इस सिंडिकेट के कामकाज को जारी रखा जा सके। मामले में आगे की जांच जारी है।
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