नयी दिल्ली , फरवरी 16 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 'मैक्सीज़ोन टच प्राइवेट लिमिटेड' और इसके निदेशकों चंदर भूषण सिंह और प्रियंका के खिलाफ धन शोघन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है।

ईडी के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने सोमवार को बताया कि यह मामला 16,927 निवेशकों से एकत्र किए गए 308 करोड़ रुपये के बड़े पोंजी धोखाधड़ी का है। एजेंसी ने बताया कि उसने इस मामले में 11 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की है।

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने अपनी कंपनी के माध्यम से निवेशकों को 15 प्रतिशत का आजीवन मासिक रिटर्न देने का वादा करके लुभाया था। धन एकत्र करने के बाद, उन्होंने अचानक भुगतान बंद कर दिया और फरार हो गए।

एजेंसी ने झारखंड पुलिस द्वारा जमशेदपुर के साकची और गोविंदपुर थानों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की थी। दोनों आरोपियों को 2023 में 'घोषित अपराधी' घोषित किया गया था। उन्हें 2025 में ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वे रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

जांच से पता चला कि कंपनी एक पोंजी स्कीम चला रही थी, जिसमें कोई वास्तविक व्यापार या व्यावसायिक गतिविधि नहीं की जाती थी। नए निवेशकों से मिले धन का उपयोग पुराने निवेशकों को 'रिटर्न' देने के लिए किया जाता था। आरोपियों ने कथित तौर पर जनता को धोखा देने के लिए खुद को राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) से संबंधित बताया। इस बीच रिजर्व बैंक ने पुष्टि की कि कंपनी के पास कोई एनबीएफसी पंजीकरण नहीं था, जिससे इसकी जमा-स्वीकार करने वाली गतिविधियां शुरुआत से ही अवैध थीं।

आरोपी चंदर भूषण सिंह के लैपटॉप से बरामद डिजिटल साक्ष्यों के फोरेंसिक विश्लेषण से घोटाले के वास्तविक पैमाने का पता चला, जिसमें 16,927 निवेशक और लगभग 307.95 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई शामिल थी। इसकी पुष्टि 21 बैंक खातों में कुल 521.45 करोड़ रुपये जमा होने से हुई। इसमें से 249.69 करोड़ रुपये 'रिटर्न' के रूप में निवेशकों को लौटा दिये गये, जबकि 58.27 करोड़ रुपये रियल एस्टेट, सोने के आभूषण और क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में लगा दिए गए। इस प्रकार अपराध की कमाई को छिपाया गया और उसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश किया गया। आरोपी ने अपनी फरारी के दौरान कथित तौर पर कानून से बचने के लिए 'दीपक सिंह' के नाम से एक फर्जी आधार कार्ड भी बनाया था।

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