नयी दिल्ली , फरवरी 20 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर कार्यालय ने शुक्रवार को उद्योगपति एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट मामले से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतनु चौधरी और उनकी फर्म फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स समेत पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया ।
ईडी ने लुधियाना के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच शुरू की। एजेंसी के अनुसार जांच से पता चला कि आठ अन्य साइबर अपराध मामलों से हुई कमाई भी 2024 में फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खाते में जमा की गई थी।
ईडी ने आरोप लगाया कि ओसवाल की डिजिटल गिरफ्तारी के दौरान धोखेबाजों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों का रूप धारण करके उससे सात करोड़ रुपये ऐंठ लिए। जांच में पाया गया कि पैसे अवैध धन हस्तांतरण खातों के जरिए भेजे गए थे, जिन्हें आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर चलाते थे। यह भी आरोप लगाया गया कि रूमी कलिता अतनु चौधरी से जुड़ा था और उसने उसकी कंपनी मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खाते का इस्तेमाल गैर-कानूनी कमाई को शोधित करने के लिए किया।
दूसरे साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी मामलों से मिले पैसे भी फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स और रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में जमा किए गए थे। एजेंसी ने कहा कि अपराध से मिली धनराशि को बाद में दूसरी जगह भेजने और छिपाने के लिए कई अवैध खातों में भेजा गया।
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