त्रिशूर , दिसंबर 15 -- केरल में वर्ष 2017 में अभिनेत्री यौन उत्पीड़न को लेकर अभी हाल ही में अदालत के आए फैसले पर टिप्पणी करते हुए पीडि़ता ने कहा कि इस देश में हर नागरिक के साथ कानून के सामने समान व्यवहार नहीं किया जाता। उनकी यह टिप्पणी यौन उत्पीड़न का साजिश रचने वाले मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी किए जाने के संदर्भ में आई है।

ट्रायल कोर्ट में मामले को जिस तरह से हैंडल किया गया, उसके खिलाफ पीडि़ता ने इन शब्दों में अपनी भावना को व्यक्त किया, ''यह सालों के दर्द, आंसुओं और भावनात्मक संघर्ष के बाद एक दर्दनाक एहसास था।''गौरतलब है कि एनार्कुलम के मुख्य जिला और सत्र अदालत की जज हनी एम वर्गीस ने अभिनेत्री का अपहरण करने और यौन उत्पीड़न करने के आरोप में छह लोगों को दोषी ठहराया और अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया, जो आठवें आरोपी थे और जिन पर अपराध की साजिश रचने का आरोप था।

पीड़िता ने कहा, "यह फैसला कई लोगों को हैरान कर सकता है लेकिन मुझे नहीं। 2020 की शुरुआत में ही मुझे लगने लगा था कि कुछ ठीक नहीं है। यहां तक कि अभियोजन पक्ष ने भी मामले को हैंडल करने के तरीके में बदलाव देखे। खासकर तब जब एक खास आरोपी की बात आई।"उन्होंने जब खुद मामले की सुनवाई के लिए एक महिला जज की याचिका दायर की, तो उसके बाद के सालों में अभियोजन पक्ष और पीड़िता को अदालत से दुश्मनी का सामना करना पड़ा। गत 14 दिसंबर को प्रकाशित एक बयान में उन्होंने ट्रायल अदालत में विश्वास खोने के छह कारण बताए।

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